एक बार कह दिया हां और विवादों का निपटारा, तो फिर पलट नहीं सकते; तलाक मामले में SC का बड़ा फैसला
मामला एक दंपत्ति से जुड़ा है जिनकी शादी वर्ष 2000 में हुई थी। वर्ष 2023 में पति ने तलाक की अर्जी दी। फैमिली कोर्ट द्वारा दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजने के बाद, उनके बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत वे आपसी सहमति से तलाक लेने पर सहमत हो गए।

सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक लेने के मामले में एक बड़ी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि सभी तरह के विवादों के निपटान और समझौते के बाद कोई भी पक्ष मनमर्जी से तलाक के मुद्दे पर पीछे नहीं हट सकता है। तलाक से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की है कि, हालांकि पति या पत्नी कानूनी तौर पर आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए दी गई सहमति वापस लेने के हकदार होते हैं, लेकिन अगर दोनों पक्ष पहले ही सभी विवादों के पूर्ण और अंतिम निपटारे के तौर पर अपनी शादी खत्म करने पर सहमत हो चुके हों, तो ऐसी स्थिति में वे सहमति वापस नहीं ले सकते।
जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने यह टिप्पणी एक पत्नी पर सख्त रुख अपनाते हुए की, जिसने कोर्ट द्वारा मंज़ूर किए गए मध्यस्थता समझौते से पीछे हटने की कोशिश की थी। यह पीठ दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली पति की अपील पर सुनवाई कर रही थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मध्यस्थता समझौता होने के बावजूद घरेलू हिंसा की कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी थी, जबकि उस समझौते में स्पष्ट रूप से यह शर्त थी कि दोनों पक्षों के बीच भविष्य में कोई मुकदमा नहीं लड़ा जाएगा।
क्या है मामला?
मामला एक दंपत्ति से जुड़ा है जिनकी शादी वर्ष 2000 में हुई थी। वर्ष 2023 में पति ने तलाक की अर्जी दी। फैमिली कोर्ट द्वारा दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजने के बाद, उनके बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत वे आपसी सहमति से तलाक लेने पर सहमत हो गए। पति ने अपनी तरफ से तलाक की पहली अर्जी वापस लेने, पत्नी को दो किस्तों में 1.5 करोड़ रुपये देने, कार खरीदने के लिए उसे 14 लाख रुपये देने और कुछ गहने सौंपने पर सहमति जताई। पत्नी ने भी एक 'गिफ्ट डीड' (दान-पत्र) के ज़रिए पति को 2.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने पर सहमति जताई; यह रकम उनके संयुक्त व्यापार खाते में जमा थी। इसके बाद, दोनों ने मिलकर आपसी तलाक की अर्जी दायर की।
फिर क्या हुआ?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पति ने पहली किस्त के तौर पर पत्नी को 75 लाख रुपये दिए, साथ ही 14 लाख रुपये का भुगतान भी किया। पत्नी ने भी पति को 2.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, तलाक के अंतिम चरण से ठीक पहले, पत्नी ने आपसी तलाक के लिए दी गई अपनी सहमति वापस ले ली और 'घरेलू हिंसा अधिनियम' की धारा 12 के तहत पति और उसकी माँ के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें समन जारी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट से होते हुए मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून के तहत कोई भी पक्ष अंतिम आदेश से पहले सहमति वापस ले सकता है लेकिन, अगर पहले ही सभी विवादों का पूरा और अंतिम समझौता हो चुका है, तो उस समझौते को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने पत्नी के इस कदम को गंभीरता से लेते हुए कहा कि समझौते के लाभ लेने के बाद पीछे हटना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा है। यह मामला हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें घरेलू हिंसा की कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


