राहुल गांधी आए नहीं, भाजपा ने सुनी नहीं, भूखे बैठे सोनम वांगचुक; क्या है CJP का संसद प्लान

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर मंतर पर 17 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है और खबर के वजन 8 किलो से ज्यादा घट चुका है। अब तक कांग्रेस ने इस प्रदर्शन से दूरी बना रखी है। अब सीजेपी संसद मार्च का प्लान कर रही है।

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दिल्ली के जंतर मंतर पर जारी CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में युवा नजर आ रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की गैर मौजूदगी की है। यहां जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है और अब चर्चाएं जोर पकड़ रहीं हैं कि सीजेपी का अगला कदम क्या होगा।

अभिजीत दीपके क्या बोले थे

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके से एक इंटरव्यू के दौरान जब पूछा गया कि वह किस पार्टी को प्रदर्शन में शामिल होते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा था, 'मौजूदा राजनीतिक दलों में से हम किसी को भी नहीं चाहते हैं। ये जो आंदोलन है, ये आंदोलन अब जोर पकड़ रहा है, क्योंकि यह आम युवाओं की आवाज है। अगर राजनीतिक दलों के नेता आ जाएंगे, तो क्या पॉइंट होगा। उन्हीं की वजह से जो वो काम नहीं कर पाए, इसलिए तो सीजेपी का जन्म हुआ। वो अच्छे से काम कर लेते तो सीजेपी के पीछे लोग क्यों आते।'

भाजपा और कांग्रेस से मांगा साथ

सीजेपी ने मंगलवार को कहा कि उसने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत विभिन्न दलों के नेताओं से संपर्क किया है। प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि नड्डा और राहुल के अलावा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, तेलुगु देशम पार्टी सांसद लावु श्री कृष्ण देवरायलू, जनता दल-यूनाइटेड के राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा और युवजन श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी सांसद पीवी मिधुन रेड्डी को भी पत्र लिखा है। इसमें उनसे जंतर-मंतर आने तथा प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने का आग्रह किया गया है।

उन्होंने बताया कि सीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, द्रविड़ मुनेत्र कषगम नेता कनिमोई और तिरुचि शिवा, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव, शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे सांसद संजय राउत, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी, राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव और पार्टी की सांसद मीसा भारती को भी इस सिलसिले में पत्र भेजा है।

दास के मुताबिक, तमिलगा वेत्री कषगम प्रमुख एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय, आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को भी इसी तरह का पत्र लिखा गया है।

ये नेता जंतर मंतर जा चुके

प्रदर्शन स्थल का दौरा करने वालों में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल, सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष शामिल हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सांसद अमरा राम, पार्टी की वरिष्ठ नेता सुभाषिनी अली, केरल सरकार में मंत्री रह चुकी केके शैलजा, थॉमस आइजैक, केएन बालगोपाल और पी राजीव और त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता और माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य जितेंद्र चौधरी और शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दूर

अब तक सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत को लेकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, राहुल गांधी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए हैं। उनकी गैर मौजूदगी की चर्चाएं जोर पकड़ रहीं हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी ने कांग्रेस के शामिल नहीं होने की वजह भी बताई है।

उन्होंने लिखा, 'जब शिक्षा के क्षेत्र में असल इनोवेशन के लिए पहचाने जाने वाले वांगचुक जी जैसे व्यक्ति लाखों बच्चों और उनके माता-पिता का भविष्य बर्बाद करने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठते हैं, तो इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनकी बिगड़ती सेहत हम सभी के लिए चिंता का विषय है जो न्याय की परवाह करते हैं। कांग्रेस उनके और इन मुद्दों के खिलाफ लड़ने वाले हर नागरिक के साथ खड़ी है। हम उनके मकसद, लद्दाख के अधिकारों और अपने युवाओं के लिए शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की परवाह करते हैं।'

पूछ लिया सवाल

उन्होंने कहा, 'हमें पूरी बात रखनी चाहिए। यह कहना सही नहीं होगा कि कांग्रेस ने इसे नजरअंदाज कर दिया है। कांग्रेस या किसी भी नेता ने एक बार भी इन युवाओं और सोनम वांगचुक पर सवाल नहीं उठाए कि वो NSUI और IYC के प्रदर्शनों में साथ क्यों नहीं दे रहे हैं। इसके बजाए हम उनके साथ ही इन मुद्दों पर लड़ रहे हैं।'

कांग्रेस के अलग प्रदर्शन जारी

मेवाणी ने जानकारी दी है कि NSUI और IYC पेपर लीक और परीक्षा घोटालों को लेकर पूरे भारत में प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज लॉन्च की है। उन्होंने बताया, 'यह 28 शहरों में राष्ट्रीय स्तर का अभियान है।'

इस दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'यह संवेदनहीनता या असुरक्षा नहीं है। यह दुख को तमाशा बनाए बिना एकजुटता दिखाने का तरीका है। कांग्रेस न तो बीजेपी जैसी है और न ही चुनावों के समय AAP की तरह चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देने वाली पार्टी है (गुजरात में बिल्किस बानो का मामला याद करें)। हम सभी के अधिकारों के लिए खड़े हैं।'

आगे क्या प्लान

धरने के बाद अब सीजेपी ने मार्च की तैयारी की है। खबर है कि संगठन ने 20 जुलाई यानी संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च की योजना बना रहा है। साथ ही समर्थकों से मिस्ड कॉल अभियान के माध्यम से इसमें शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है। प्रवक्ता विजेता दहिया ने लोगों से एकजुट होने की अपील की है।

कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत

आंदोलन के आयोजकों के हवाले से पीटीआई भाषा ने बताया कि अनिश्चितकालीन अनशन के दौरान सोनम वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम घट गया है। उनका रक्तचाप घटकर 107/70 एमएमएचजी रह गया है, जबकि ब्लड ग्लूकोज का स्तर भी घटकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया है। दीपके ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील करते हुए कहा कि लोगों की जान दांव पर लगी है।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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