सोनम वांगचुक को प्राइवेट हॉस्पिटल भेजने से क्यों रोका जा रहा? कोर्ट के आदेश को दी जाएगी चुनौती

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गीतांजलि ने आरोप लगाया कि वांगचुक के इलाज को लेकर सरकार के रवैये में भरोसे की कमी है। उन्होंने कहा, ‘सरकार जिस तरह से चीजों को संभाल रही है, उसे लेकर भरोसे की कमी है। खून का सैंपल देने के लिए 10 घंटे इंतजार किया।’

सोनम वांगचुक को प्राइवेट हॉस्पिटल भेजने से क्यों रोका जा रहा? कोर्ट के आदेश को दी जाएगी चुनौती
Sonam Wangchuk legal team to challenge High Court order denying shift to private hospital

दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से किसी प्राइवेट हॉस्पिटल भेजने की इजाजत नहीं दी। इस इनकार के बाद अब उनके वकीलों ने फैसले को चुनौती देने का ऐलान किया है। सीनियर वकील विवेक तन्खा ने कहा कि उनकी कानूनी टीम दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर करेगी। उनका कहना है कि प्रत्येक मरीज को यह अधिकार है कि वह अपनी पसंद के अस्पताल और डॉक्टर से इलाज कराए। तन्खा ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति निजी अस्पताल में इलाज कराना चाहता है, तो उसे ऐसा करने से क्यों रोका जा रहा है।

सुनवाई के बाद वकील तन्खा ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और अस्पताल प्रशासन को वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए सरकार का उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाने का फैसला मनमाना नहीं था। अदालत के अनुसार, अस्पताल में उन्हें केवल उनकी सहमति से मौखिक दवाएं और तरल पदार्थ दिए गए हैं। उनके साथ किसी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई है। साथ ही उनके परिवार को उनसे मिलने की पूरी इजाजत भी दी गई है।

सोनम वांगचुक की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो ने रविवार को कहा कि ऐसा महसूस होता है कि जंतर-मंतर से जबरन हटाए जाने के बाद उनके पति को सफदरजंग अस्पताल में अवैध हिरासत में रखा गया है। गीतांजलि ने आरोप लगाया कि वांगचुक के परिजन को यह तय करने का बुनियादी अधिकार भी नहीं दिया गया कि उनका इलाज कहां कराया जाए। उन्होंने कहा कि परिजन वांगचुक को मेदांता या अपनी पसंद के किसी दूसरे निजी अस्पताल में भेजना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'हम सिर्फ वांगचुक को मेदांता या अपनी पसंद के किसी अन्य अस्पताल में ले जाना चाहते हैं, जहां हमें बेहतर महसूस हो। भारत में यह हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। आपको किसी खास डॉक्टर या अस्पताल से इलाज कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हम केवल इलाज की जगह चुनने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहते हैं।'

गीतांजलि ने आरोप लगाया कि वांगचुक के इलाज को लेकर सरकार के रवैये में भरोसे की कमी नजर आ रही है। उन्होंने कहा, 'सरकार जिस तरह से चीजों को संभाल रही है, उसे लेकर भरोसे की कमी है। हमें खून का सैंपल देने के लिए 10 घंटे इंतजार करना पड़ा। ऐसी चीजें भरोसे की कमी पैदा करती हैं। हम नहीं चाहते कि उन्हें ऐसे अस्पताल में रखा जाए, जहां इतनी बड़ी संख्या में पुलिस तैनात हो और जहां पानी की बौछारें करने वाले वाहन लगाए गए हों। हम चाहते हैं कि उन्हें ऐसी जगह रखा जाए, जहां वह सहज महसूस कर सकें।' गीतांजलि ने बताया कि वांगचुक ने तरल पदार्थ लेने की डॉक्टरों की सलाह के बावजूद अपनी भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

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पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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