'सोनम वांगचुक देश के हीरा', पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस MP ने दिया समर्थन, बोले- 20 जुलाई को...
कांग्रेस सांसद ने पार्टी लाइन से हटकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्तन किया है और कहा है कि वह भी 20 जुलाई से शुरु होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च में शामिल होंगे।

महाराष्ट्र से कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले ने बुधवार (15 जुलाई) को जंतर-मंतर पर पहुंचकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोक जनता पार्टी (CJP) द्वारा जारी प्रदर्शन के प्रति अपना समर्थन जताया। इस मौके पर पडोले ने यह भी कहा कि वह 20 जुलाई को संसद तक निकाले जाने वाले मार्च में शामिल होंगे। उन्होंने दावा किया कि देश के युवाओं के सपने सरकारी भ्रष्टाचार की वजह से पूरे नहीं हो पा रहे हैं। पडोले ने उस समय वांगचुक के प्रति अपना समर्थन जताया है, जब उनकी पार्टी कांग्रेस ने इस प्रदर्शन से दूरी बनाकर रखी है।
महाराष्ट्र के भंडारा गोंदिया से लोकसभा सांसद प्रशांत पडोले ने कहा, ''बच्चों ने जो सपना देखा, वह पूरा नहीं हो रहा है क्योंकि यह सरकारी भ्रष्टाचार है। पिछले 10 वर्षों में 70 बार पेपर लीक हुए हैं।'' उन्होंने आंदोलन में शामिल युवाओं की सराहना करते हुए कहा, ''मैं आपका धन्यवाद करता हूं कि आप छात्रों के हक के लिए लड़ रहे हैं। मैं दिलो-जान से आप लोगों का समर्थन करता हूं।'' कांग्रेस सांसद ने कहा कि जहां भी उनकी जरूरत होगी, वह वहां मौजूद रहेंगे।
सोनम जी देश के हीरा हैं
पडोले ने सोनम वांगचुक के स्वस्थ रहने की कामना करते हुए कहा, ''सोनम जी देश के हीरा हैं और वे हमेशा स्वस्थ रहें।" उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यदि उनमें ईमानदारी होती तो वह पद छोड़ देते। पडोले ने कहा, ''कांग्रेस के नेताओं ने छोटी-छोटी बातों पर भी इस्तीफा दिया है। क्या इस सरकार के लिए लोगों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण सत्ता है?'' नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। संगठन ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने की भी घोषणा की है।
शशि थरूर ने भी दिया समर्थन
बता दें कि कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने भी बुधवार को सोनम वांगचुक के प्रति अपना समर्थन जताया था। हालांकि, वह जंतर मंतर पर नहीं पहुंचे लेकिन उन्होंने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की और कहा कि केंद्र सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करना कमजोरी नहीं, बल्कि राजनीतिक सूझबूझ (स्टेटमैनशिप) का परिचायक होगा। थरूर ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के नाम लिखे एक खुले पत्र में कहा कि सोमवार से संसद का सत्र फिर शुरू हो रहा है और छात्रों के मुद्दों को लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर उठाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, ''यही वह जगह है जहां इस समस्या का समाधान होना चाहिए, न कि आमरण अनशन के जरिये। कृपया मेरी अपील पर ध्यान दें।''
निष्पक्ष परीक्षाओं से सपने साकार होते हैं
थरूर ने कहा, ''मेरे प्रिय युवा मित्रों, मैं आज आपसे एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बात कर रहा हूं जो आपकी पीढ़ी के साथ जो कुछ हो रहा है, उससे गहराई से व्यथित है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत विषय है। मेरा जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। मेरे पिता अखबार में वेतनभोगी कर्मचारी थे और मेरी मां गृहिणी थीं। एक आय में तीन बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा था।'' उन्होंने कहा, ''हमारे जैसे परिवार के लिए योग्यता कोई नारा नहीं थी। छात्रवृत्ति, निष्पक्ष परीक्षाएं और ईमानदार परिणाम ही वह माध्यम थे, जिनके सहारे एक वेतन में तीन बच्चों के सपनों को पूरा किया जा सकता था।''
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


