
जेल में रहकर उसे बेहतर बनाने पर काम कर रहे सोनम वांगचुक, पत्नी ने बताई पूरी बात
क्लाइमेट एक्टविस्ट सोनम वांगचुक इन दिनों जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है। उनसे मिलकर आई उनकी पत्नी ने दावा किया कि सोनम ने जेल में थर्मामीटर की मांग की है, ताकि वह जेल के बैरकों में पर्यावरणीय अनुकूलन का प्रयोग कर सकें।
जोधपुर जेल में बंद क्लाइमेट एक्टविस्ट सोनम वांगचुक इन दिनों वहां के हालात ठीक करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। पिछले लगभग 4 महीनों से जेल में बंद वांगचुक ने अपने बैरक को ही अपनी प्रयोगशाला बना लिया है। उनसे मुलाकात करने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि ने बताया कि वांगचुक फिलहाल एकांत कारावास में हैं और वहां पर वह अपने नवाचारों में मन लगा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर पोस्ट करके गीतांजलि ने इसके लिए पहले उन्होंने चीटिंयों पर आधारित किताब 'एंट्स: वर्कर्स ऑफ द वर्ल्ड' मंगवाई थी। अब उन्होंने थर्मामीटर्स की मांग की है। उन्होंने लिखा, "मैंने कल सोनम वांगचुक से मुलाकात की और आखिरकार उन्हें चींटियों पर किताब सौंप पाई, जो उनके सबसे बड़े भाई की ओर से दिया गया उपहार थी। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और उसके समाधान पर वे किताबें भी दीं, जिनकी उन्होंने मांग की थी।"
गीतांजलि ने लिखा, "उन्होंने (वांगचुक) ने मुझसे जेल प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट से यह जानकारी लेने को कहा है कि क्या वे थर्मामीटर जैसे उपकरण हासिल कर सकते हैं, ताकि पर्यावरण के अनुकूल वास्तुकला (ईको-रिस्पॉन्सिव आर्किटेक्चर) पर सरल प्रयोग कर जेल बैरकों को बेहतर बनाया जा सके।” इसके बाद गीतांजलि ने सोनम को तत्काल रिहा करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सोनम को तुरंत रिहा कर दिया जाना चाहिए, ताकि वह देश और सैनिकों के लिए बाहर आकर बेहतर काम कर सकें।
आपको बता दें, रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस हिंसा के पीछे सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख को राज्य और छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए किए जा रहे आंदोलन को वजह माना गया था। तब से लेकर अब तक वांगचुक जोधपुर सेंट्रल जेल में ही बंद हैं।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक पहले भी कई बेहतरीन प्रयोग कर चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा चर्चित प्रयोग भारतीय सैनिकों के लिए अत्याधिक ठंड से बचने के लिए बनाई गई एक डिवाइस थी। इसके जरिए माइनस डिग्री की ठंड में भी सैनिक आसानी से रह सकते थे।





