मुझे विरोध का प्रतीक मत बनाओ, सोनम वांगचुक की युवाओं से अपील; गालियों पर भी बोले
Sonam Wangchuk: कॉकरोच पार्टी के झंडे तले अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने कहा है कि उन्हें विरोध का चेहरा न बनाया जाए। राजनेताओं को दी जाने वाली गालियों को लेकर उन्होंने कहा कि वह इनका समर्थन नहीं करते, लेकिन नेताओं को सोचना चाहिए कि आखिर युवाओं में इतनी निराशा क्यों है।

Sonam Wangchuk: नीट पेपर लीक के मामले में अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने युवाओं से अपना हीरो खुद बनने की अपील की है। दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के तले 26 दिनों का अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने कहा कि वह सरकार के खिलाफ होने वाले हर छात्र आंदोलन का चेहरा नहीं बनना चाहते। इसके साथ ही उन्होंने जंतर मंतर आंदोलन में पीएम मोदी और सरकार के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल पर भी अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक नेताओं के खिलाफ अपशब्दों के प्रयोग को सही नहीं मानते हैं।
इंडिया टुडे से बात करते हुए सोनम वांगचुक ने जोर देकर कहा कि सरकारों को छात्रों को जेल भेजने और सजा देने की जगह उनके गुस्से के पीछे की वजहों को समझने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की भी जगह होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रदर्शन का उद्देश्य अहिंसक तरीके से सिस्टम में सुधार का होना चाहिए।
राजनेताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का समर्थन नहीं- वांगचुक
जंतर मंतर में प्रदर्शन के दौरान कई राजनेताओं को गालियां दी गई थीं। इस मामले पर वांगचुक ने कहा कि वह ऐसी भाषा का समर्थन नहीं करते हैं। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि नेताओं को छात्रों की निराशा को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं अपमानजनक भाषा को बिल्कुल भी सही नहीं मानता। लेकिन सरकार के लिए, यह इस बात का संकेत है कि हमारे युवा कितने निराश हो गए हैं।"
वांगचुक ने जोर देकर कहा कि अगर वे प्रधानमंत्री की जगह होते, तो वे सिर्फ युवाओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने के बजाय खुद से पूछते कि युवा इतने गुस्से में क्यों हैं। उन्होंने कहा, "अगर मैं प्रधानमंत्री की जगह होता, तो मैं सबसे पहले खुद से पूछता कि मैंने ऐसा क्या बुरा किया है कि उनमें इतना गुस्सा पैदा हो गया।"
अपने हीरो स्वयं बनें युवा- सोनम वांगचुक
26 दिन तक नीट के मुद्दे पर अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने युवाओं से अपना हीरो स्वयं बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह सरकार के खिलाफ विरोध का चेहरा नहीं बनना चाहते। युवाओं को अपने हक के लिए लड़ना होगा, उन्हें अपना हीरो स्वयं ही बनना होगा। हालांकि, वांगचुक ने कहा कि वह लगातार जलवायु, पर्यावरण और शिक्षा जैसे मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों को समर्थन देते रहेंगे। उन्होंने कहा, "शिक्षा और पर्यावरण मेरे बेहद करीब हैं। मैं एसी किसी भी जगह और आंदोलन का समर्थन करना चाहूंगा, जो इन दो विषयों के लिए सही आवाज उठा रहे हों।
मुझे विरोध का चेहरा न बनाएं- सोनम वांगचुक
झारखंड में चल रहे प्रोटेस्ट का हिस्सा बनने को लेकर पूछे गए सवाल पर वांगचुक ने कहा कि वह किसी भी आंदोलन का चेहरा नहीं बनना चाहते। उन्होंने कहा, “मेरा ऐसा कुछ भी बनने का इरादा नहीं है। मैं बस चाहता हूं कि हर कोई अपनी-अपनी जगह पर खुद का हीरो बने।” उन्होंने कहा कि उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी के झंडे तले आंदोलन का नेतृत्व करने में कोई पछतावा नहीं है। परीक्षाओं को लेकर छात्रों के उठते आंदोलनों को सही संकेत बताते हुए वांगचुक ने कहा कि सरकार को असहमति को खतरा मानने के बजाय इन नागरिकों का स्वागत करना चाहिए। उन्होंने कहा, "एक खामोश आबादी किसी भी शासन प्रणाली के लिए सबसे बुरी बात हो सकती है।"
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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