मैं अपनी पसंद का इलाज चाहता हूं, सरकार कैसे ऐतराज कर सकती है: कोर्ट से सोनम वांगचुक
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक ने अपील की कि उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया जाए। इसके लिए उनके वकील कपिल सिब्बल ने मेदांता अस्पताल का नाम भी सुझाया।

दिल्ली हाई कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किए जाने की मांग पर उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर सुनवाई हुई। बहस के दौरान, वांगचुक की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल ने दावा किया कि वांगचुक के वकीलों और डॉक्टरों से संपर्क नहीं हो सका। उन्हें सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाना चाहिए। जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच मामले की सुनवाई की।सिब्बल ने कोर्ट में वांगचुक की ओर से कहा कि मैं अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज चाहता हूं, सरकार इस पर कैसे ऐतराज कर सकती है?
लाइव लॉ के अनुसार, कपिल सिब्बल ने कहा, ''वह हिरासत में नहीं है। उनके खिलाफ कोई केस नहीं है। क्या भारत के नागरिक को यह कहने का हक नहीं है कि मैं अपनी पसंद के हॉस्पिटल जाना चाहता हूं? जब ऑर्डर पास हुआ, तो मैं पार्टी नहीं था। मेरे खिलाफ एकतरफा केस है। मैं अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज चाहता हूं। सरकार इस पर कैसे ऐताज कर सकती है?'' सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि आरएमएल के डॉक्टर 17 जुलाई को आए और वांगचुक का स्वास्थ्य मॉनिटर किया। इसके बाद, 18 जुलाई को उन्हें सुबह-सुबह सफदरजंग शिफ्ट कर दिया गया। उनके डॉक्टरों, उनके वकीलों से कोई संपर्क नहीं हो सका। हमें नहीं पता कि उन्हें कौन से प्रिस्क्रिप्शन दिए गए थे। हमने तय किया कि वांगचुक को डिस्चार्ज कर दिया जाना चाहिए। कोई डिटेंशन नहीं, कोई ऑफेंस नहीं। उन्होंने कहा कि हम वांगचुक को डिस्चार्ज करवाना चाहते हैं। हमने मेदांता में बात कर ली है।
वहीं, सरकार की ओर से पेश हुए एएसजी ने कहा कि अगर हम पैरा 4,5 पढ़ें तो मुझे कुछ जिम्मेदारी के साथ कहना होगा। डॉक्टर कविता रानी, डायरेक्टर सफदरजंग, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, सीनियर फैकल्टी AIIMS, मेडिकल सफदरजंग, सभी कोर्ट में हैं। मेडिकल बुलेटिन भी जारी किए गए हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि आपको मुझे बताना होगा कि क्या कोई मजबूरी थी, जिसकी वजह से आप उन्हें ले गए?
इस पर एएसजी ने जवाब दिया कि उनकी सेहत बिगड़ रही थी। इस मौसम में 18 दिन तक उपवास करने के बाद, फिर इससे कीटोसिस नाम का सिंड्रोम हो जाता है। यह पैरामीटर्स पर असर डाल सकता है या नहीं भी डाल सकता है, लेकिन इससे शॉक जैसी कोई चीज हो सकती है। अगर पोटैशियम कम हो जाता है, तो इससे एक तरह का हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। सुनवाई के दौरान एम्स के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अक्षय ने कोर्ट से कहा कि हम उनका इलाज कर रहे हैं। करीब से नजर रख रहे हैं। उन्होंने कल से मुंह से तरल पदार्थ लेना शुरू किया। कल पोटैशियम ओरल लिया, बिना चीनी के ओरल ORS लिया। हम उनसे तरल पदार्थों के लिए बात करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वह डिहाइड्रेटेड है। उन्हें पोटैशियम के साथ कार्ब्स चाहिए। अगर उन्हें वह नहीं मिलता, तो नुकसानदायक होगा।
हालांकि, सुनवाई के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट अस्पताल में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत की वजह से उन्हें सफदरजंग अस्पताल में रखना केंद्र का मनमाना फैसला नहीं है।
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