
गुनहगार तो कुछ ही हैं, लेकिन बदनाम हर कश्मीरी को किया जा रहा; उमर अब्दुल्ला को सता रही एक चिंता
अब्दुल्ला ने इस पर कहा कि जिम्मेदार तो कुछ लोग ही हैं। लेकिन माहौल ऐसा बनाया जा रहा है किहम सभी ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने 2019 में कहा था कि सब कुछ रुक जाएगा, लेकिन जम्मू-कश्मीर को विभाजित करने के बाद भी कुछ नहीं बदला।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि कुछ लोगों द्वारा की गई आतंकी हरकत की वजह से पूरे कश्मीर घाटी के लोगों यानी सभी कश्मीरियों को न सिर्फ बदनाम किया जा रहा है बल्कि उन्हें निशाने पर लिया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कश्मीरियों की इस तरह की जा रही प्रोफाइलिंग ने उन्हें क्षेत्र के बाहर के किसी भी व्यक्ति से बातचीत करने से रोक दिया है। उन्होंने ये बातें दिल्ली में लाल किला के पास हुए आत्मघाती कार धमाके के लिए जिम्मेदार सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के संदर्भ में कही हैं, जिसमें कुछ डॉक्टर भी शामिल थे, जो जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं।
अब्दुल्ला ने इस पर कहा, "इस हमले के लिए ज़िम्मेदार तो कुछ लोग ही हैं। लेकिन माहौल ऐसा बनाया जा रहा है कि इसके लिए हम सभी ज़िम्मेदार हैं।" उन्होंने कहा कि केंद्र ने 2019 में कहा था कि "सब कुछ रुक जाएगा", लेकिन केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद भी कुछ नहीं बदला। उन्होंने कहा, "मौजूदा स्थिति के बारे में हम क्या कह सकते हैं? अगर यह (आतंकवादी हमला) दिल्ली में नहीं हुआ होता तो यहाँ (कश्मीर) हो रहा होता।" उन्होंने आगे कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद भी बम विस्फोट और नागरिकों की हत्याएँ नहीं रुक सकी हैं।
कोई भी अपने बच्चों को कश्मीर से बाहर नहीं भेजना चाहता
मुख्यमंत्री ने कहा, "हम चाहते हैं कि यह रुक जाए। हमने कश्मीर में बहुत खून-खराबा देखा है... मौजूदा हालात को देखते हुए, कोई भी अपने बच्चों को कश्मीर से बाहर नहीं भेजना चाहता। हर जगह लोग हम पर शक करते हैं। कश्मीरियों को बदनाम किया जा रहा है।" उन्होंने कहा, "देखिए दिल्ली में क्या हुआ। इसके लिए कुछ लोग ज़िम्मेदार हैं। लेकिन ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि हम सब ज़िम्मेदार हैं। दिल्ली में जम्मू-कश्मीर में पंजीकृत गाड़ी चलाना अपराध माना जाता है। मुझे तो यह भी सोचना पड़ता है कि अपनी गाड़ी निकालूँ या नहीं। मुझे नहीं पता कि कौन मुझे रोकेगा और पूछेगा कि मैं कहाँ से हूँ और वहाँ क्या कर रहा हूँ।"
2019 के बाद भी कुछ नहीं बदला: उमर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को दावा किया कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने से केंद्र शासित प्रदेश में रक्तपात बंद नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अब्दुल्ला ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में संवाददाताओं से कहा, “हम चाहते हैं कि यह (हिंसा का दौर) रुके। जम्मू-कश्मीर, खासकर कश्मीर, पिछले 30 से 35 साल में बहुत रक्तपात देख चुका है। हमें बताया गया था कि अब ऐसा नहीं होगा और 2019 के बाद यह दौर खत्म हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”
पिता के बयान से विवाद
केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया था, जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। साथ ही, तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को भी विभाजित कर दिया गया तथा दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तब्दील कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उनके पिता, फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने 15 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकवादी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया था। सीनियर अब्दुल्ला ने पूछा था कि उन कारणों का पता लगाया जाना चाहिए कि डॉक्टरों ने "यह रास्ता" क्यों अपनाया था।





