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सौर तूफान से गर्म हो जाता है वायुमंडल, हम पर भी असर; आदित्य एल1 ने भेजी चौंकाने वाली जानकारी

सौर तूफान से गर्म हो जाता है वायुमंडल, हम पर भी असर; आदित्य एल1 ने भेजी चौंकाने वाली जानकारी

संक्षेप:

आदित्य एल1 ने एक बेहद अहम जानकारी दी है। इसरो ने बताया कि आंकड़ों के मुताबिक सौर तूफान से धरती का चुंबकीय क्षेत्र प्रभावित होता है और वायुमंडल भी गर्म हो सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक ग्रिड, संचार उपग्रह भी प्रभावित होते हैं।

Jan 10, 2026 04:52 pm ISTAnkit Ojha पीटीआई
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शनिवार को कहा कि उसके आदित्य-एल1 सौर मिशन ने नयी जानकारी प्रदान की है कि कैसे एक शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इसरो ने एक बयान में कहा, ‘सबसे गंभीर प्रभाव सौर तूफान के अशांत क्षेत्र के प्रभाव के दौरान हुआ।’ दिसंबर 2025 में ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण अध्ययन में इसरो के वैज्ञानिकों और शोध छात्रों ने अक्टूबर 2024 में पृथ्वी को प्रभावित करने वाली अंतरिक्ष की एक बड़ी घटना का विस्तृत विश्लेषण किया।

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धरती पर सौर तूफान का असर

इस अध्ययन में भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 से प्राप्त डेटा के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, ताकि सूर्य से निकले सौर प्लाज़्मा के एक विशाल विस्फोट के पृथ्वी पर पड़े प्रभाव को समझा जा सके। बयान में कहा गया, ‘अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) से तात्पर्य अंतरिक्ष में उत्पन्न उन परिस्थितियों से है, जो सूर्य पर होने वाली अस्थायी गतिविधियों जैसे सौर प्लाज़्मा विस्फोट के कारण बनती हैं। ये घटनाएं पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार एवं दिशा सूचक सेवाओं तथा विद्युत ग्रिड अवसंरचना को प्रभावित कर सकती हैं।’

सौर तूफान से गर्म हो जाता है वायुमंडल

इसरो के अनुसार सौर तूफान के अशांत क्षेत्र ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को अत्यधिक रूप से संकुचित कर दिया, जिससे वह असामान्य रूप से पृथ्वी के बहुत करीब आ गया और कुछ समय के लिए भू-स्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) में स्थित कुछ उपग्रह उनके संपर्क में आ गए। अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि ऐसी घटना केवल अत्यंत गंभीर अंतरिक्ष मौसम घटनाओं के दौरान ही होती है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अशांत चरण के दौरान ऑरोरल क्षेत्र (उच्च अक्षांशों) में विद्युत धाराएं अत्यधिक तीव्र हो गईं। यह प्रक्रिया ऊपरी वायुमंडल को गर्म कर सकती है और वायुमंडलीय गैसों के बढ़े हुए पलायन (एटमॉस्फेरिक एस्केप) का कारण बन सकती है।

इसरो ने कहा कि ये निष्कर्ष सौर गतिविधियों की लगातार निगरानी की आवश्यकता को और मजबूत करते हैं। एजेंसी के अनुसार, यह अध्ययन अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी घटनाओं को समझने और उनके वास्तविक समय में आकलन की अहमियत को रेखांकित करता है, ताकि महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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