PM मोदी पर बात करते हुए इमोशनल हुईं स्मृति ईरानी, कहा- मेरे बाप के गिरेबान तक अगर हाथ पहुंचा तो...
पीएम मोदी के बारे में बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इमोशनल हो गईं। उन्होंने पीएम मोदी को अपने पिता की उम्र का बताते हुए कहा कि मेरे बाप के गिरेबान तक अगर आपका हाथ पहुंचा तो यह मेरी गलती है।

स्मृति ईरानी ने हालिया एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की है। इस इंटरव्यू में उन्होंने पीएम मोदी के कामों की तारीफ की। साथ ही, इमोशनल होते हुए यह भी कहा कि पीएम मोदी उनके पिता के उम्र के हैं और अगर मेरे बाप के गिरेबान तक आपका हाथ पहुंचा तो मेरी गलती है। टाइम्स नाऊ से बात करते हुए स्मृति ईरानी ने पीएम मोदी को लेकर कहा, ''ये आदमी, जिनकी मां मर गईं, वंदे भारत को झंडा दिखाने चला गया दाह संस्कार के बाद। इन्होंने बड़ी सभा करके नेताओं को इकट्ठा नहीं किया। मेरी पिता के उम्र के हैं। मेरे बाप के गिरेबान तक अगर आपका हाथ पहुंचा है तो ये मेरी गलती है।''
पीएम मोदी के बारे में स्मृति ईरानी ने कहा कि 1946 में सरदार पटेल एक डैम की कल्पना करते हैं। 1961 में नेहरू जी उसका शिलान्यास करते हैं। 1980 तक वह बनता ही नहीं है। 1995 में कोई सुप्रीम कोर्ट जाता है और काम पर रोक लगा देता है। इसके बाद, 2006-07 के आसपास नरेंद्र मोदी को पता चलता है कि काम आगे बढ़ाना है। वे मुख्यमंत्री थे। वे चिट्ठी लिखना शुरू करते हैं। बॉर्डर पर जाते हैं, वहां पर बीएसएफ का जवान मिलता है जो कहता है कि यहां पर पानी लाना पड़ता है, कुछ करिए। वह सब नोट करते हैं। मनमोहन सिंह को लेटर लिखते हैं कि डैम को 17 मीटर बढ़ाना है, लेकिन अनुमति नहीं मिलती। इसके बाद 2014 में वे पीएम बनते हैं। 17 दिन में ही 17 मीटर डैम की हाईट बढ़ाने की अनुमति दे देते हैं। चार करोड़ लोगों को उससे पानी मिला।
संसद में बहस करने को तैयार थी सरकार
ईरानी ने यह भी कहा कि पिछले संसद सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने बोला कि हम बहस करने को तैयार हैं। वह रोजाना संसद जा रहे थे। पत्रकार इसके गवाह हैं। वहीं, जब पूछा गया कि वे हाउस में नहीं गए, तो जवाब दिया कि क्योंकि हाउस चल नहीं रहा था। लोकसभा चुनाव में अमेठी से हारने के बाद दो सालों तक स्मृति ईरानी को कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई थी।
'कभी सोचा नहीं था यहां तक पहुंचेंगे'
हाल ही में उनकी वापसी हुई और भाजपा में महासचिव नियुक्त किया गया। इंटरव्यू में पिछले दो सालों में राज्यसभा न भेजे जाने पर स्मृति ईरानी ने कहा कि हमारे लिए पद कोई पहचान नहीं होता। उन्होंने कहा, ''मैं 2003 में पहली बार युवा मोर्चा महाराष्ट्र में पदाधिकारी बनी। मेरे साथ जो उपाध्यक्ष थे, वे देवेंद्र फडणवीस थे। उस समय हम लोग प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे को देखा करते थे। मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि यहां तक पहुंचेंगे।''


