भाजपा की आंधी, TMC रह गई आधी; SIR में जहां कटा वोट, उन सीटों पर कैसे पलटा गेम

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बंगाल में SIR के प्रभावों पर गौर करें तो 94 ऐसी सीटें हैं, जहां 10 फीसदी से ज्यादा वोटर्स के नाम काटे गए हैं। इनमें से 54 पर भाजपा आगे चल रही है, जबकि 36 पर टीएमसी आगे चल रही है। 2021 की तुलना में टीएमसी की सीटें आधी होती दिख रही हैं।

भाजपा की आंधी, TMC रह गई आधी; SIR में जहां कटा वोट, उन सीटों पर कैसे पलटा गेम

SIR Impact on West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों/नतीजों में साफ हो गया है कि राज्य में भाजपा की प्रचंड जीत होने जा रही है। 4 बजे तक के ताजा रुझानों और नतीजों के मुताबिक, भाजपा 191 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस 95 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है। इन चुनावी रुझानों के बीच यह चर्चा भी जोर मार रही है कि जिन सीटों पर करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम कटे, वहां इसका क्या असर पड़ा है। बता दें कि बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने लंबी कवायद और कानूनी लड़ाइयों के बाद मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा किया था और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया था, जिसमें करीब 91 लाख वोटर्स के नाम हटाए गए थे। इसका सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, मालदा, नदिया और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों पर देखने को मिला।

आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 94 ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां SIR प्रक्रिया में 2021 की तुलना में 10 फीसदी से ज्यादा वोटर्स के नाम काटे गए। अब इसके प्रभावों पर गौर करें तो इन 94 सीटों में से 54 पर भाजपा आगे चल रही है, जबकि 36 पर टीएमसी आगे चल रही है। 2021 की तुलना में टीएमसी की सीटें आधी होती दिख रही हैं, जबकि भाजपा को SIR का जबरदस्त फायदा मिलता दिख रहा है। 2021 में इन 94 सीटों में से सिर्फ 22 पर बाजपा जीती थी जो अब ढाई गुना बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि, कांग्रेस को भी 2 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है

SIR के बाद भाजपा का स्ट्राइक रेट

इसके अलावा आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि SIR का भाजपा को जबरदस्त लाभ हुआ है, भले ही 5000 वोटर्स के नाम हटाए गए हों या 25000 वोटर के नाम हटाए गए हों। NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5000 से कम नाम डिलीट किए जाने वाले कुल 13 विधानसभा सीटों में 12 पर भाजपा आगे है जबकि सिर्फ एक पर टीएमसी लीड कर रही है। ऐसी सीटों पर भाजपा का स्ट्राइक रेट 92 फीसदी है। इसी तरह 5000 से 15000 नाम काटे जाने वाली कुल 64 सीटें हैं। इनमें से 46 पर भाजपा और 17 पर टीएमसी आगे चल रही है। यानी स्ट्राइक रेट 72 फीसदी है। इसी तरह 15000 से 25000 वोटरर्स के नाम डिलीट होने वाली कुल 69 विधानसभा सीटों पर भी भाजपा को बढ़त मिली है। इनमें 44 सीटों पर बाजपा जबकि 23 पर टीएमसी की लीड है। यहां स्ट्राइक रेट 63 फीसदी है।

एक सीट पर कांग्रेस को भी फायदा

इसके अलावा 25000 से ज्यादा मतदाताओं के नाम काटे जाने वाली सीटों पर सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। ऐसी 147 असेंबली सीटों में से 88 पर भाजपा तो 59 पर टीएमसी को लीड मिली हुई है। इसका स्ट्राइक रेट 59 फीसदी है। यानी SIR प्रभावित सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा गठबंधन आगे चल रहा है। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मालतीपुर से कांग्रेस उम्मीदवार मौसम नूर आगे चल रही हैं। और पार्टी दो अन्य विधानसभा सीटों पर भी आगे है। टीवी चैनलों के शुरुआती रुझानों से यह जानकारी मिली है। जनवरी में नूर ने तृणमूल कांग्रेस में कुछ समय बिताने के बाद पुन: कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। खबरों के अनुसार, मालदा जिले की छह विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगे है, जबकि तृणमूल को चार सीटों पर बढ़त हासिल है। मालदा उन जिलों में शामिल है जहां एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सबसे अधिक नाम हटाए गए।

खतरनाक नजीर होगी

बता दें कि कई नेताओं ने कहा है कि अगर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणाम प्रभावित होते हैं तो यह एक खतरनाक नजीर होगी जिससे राजनीतिक दलों को खुद को बचाना होगा। यानी SIR पर आगे सियासी घमासान मच सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक अहम टिप्पमी करते हुए कहा है कि अगर हार-जीत का अंतर सिर्फ 2 फीसदी हो और 15 फीसदी मतदाता वोट न दे पाएं, तो अदालत को SIR पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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