
SIR का खौफ: पश्चिम बंगाल से वापस भाग रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिक
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों में अफरा-तफरी मची हुई है। पश्चिम बंगाल की हाकिमपुर चौकी पर सैकड़ों की संख्या में लोग इस समय वापस बांग्लादेश जाने के लिए लाइन लगाए खड़े हुए हैं।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) ने पश्चिम बंगाल में रहने वाले अवैध बांग्लादेशियों के मन में डर पैदा कर दिया है। राज्य में रहने वाले सैकड़ों अवैध बांग्लादेशी अब जिस रास्ते से भारत में घुसते थे उसी रास्ते से वापस भी जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में हाकिमपुर बीएसएफ सीमा चौकी के पास पक्की सड़क से निकलने वाला संकरा, धूल व कीचड़ भरा रास्ता वर्षों तक राज्य में रहने वाले “गैरकानूनी बांग्लादेशियों” के लिए वापस जाने का मार्ग बन गया है।

एजेंसी के मुताबिक हाकिमपुर बीएसएफ सीमा चौकी के पास सैकड़ों की संख्या में कई परिवार उन्हें बांग्लादेश जाने देने की गुहार लगा रहे हैं। दक्षिण बंगाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि नवंबर की शुरुआत से अपने देश लौटने की कोशिश कर रहे बिना दस्तावेज वाले बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। स्थानीय लोगों की माने तो इस रास्ते से बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी भारत में प्रवेश करते थे। लेकिन एसआईआर के शुरू होने के बाद से यह रास्ते उनके वापस जाने का केंद्र बन गया है। अब यहां पर रिवर्स माइग्रेशन शुरू हो गया है।
बांग्लादेश जाने का इंतजार कर रही एक महिला शाहिन बीबी ने बताया कि वह कोलकाता के न्यू टाउन में एक घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थी। उसने कहा, "मैं यहां (भारत) इसलिए आई थी क्योंकि हम गरीब थे। मेरे पास कोई सही दस्तावेज नहीं है। अब, मैं खुलना लौटना चाहती हूं।” महिला ने कहा कि वह लगभग 20,000 रुपये महीना कमाती थी, दो महिलाओं के साथ एक कमरे में रहती थी और नियमित रूप से पैसे घर भेजती थी।
एजेंसी के मुताबिक वहां लाइन लगाकर बांग्लादेश भेजे जाने की राह देख रहे कई लोगों ने स्वीकार किया कि भारत आने के बाद उन्होंने बिचौलियों के जरिए अवैध आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता कार्ड बनवा लिए हैं। हालांकि, अब एसआईआर कि प्रक्रिया में पुराने दस्तावेजों को मांगा जा रहा है। इसलिए उस पूछताछ से बचने के लिए वह वापस बांग्लादेश जा रहे हैं।
आठ साल तक कोलकाता में रहने वाले एक युवक ने कहा, “अब यहां नहीं रहना। अगर वे पुराने दस्तावेजों की जांच करेंगे, तो हमारे पास दिखाने के लिए कुछ नहीं होगा। बेहतर है कि पूछताछ से पहले ही निकल जाएं।”न्यू टाउन, बिराटी, धुलागोरी, बामनगाछी, घुसुरी और हावड़ा के औद्योगिक इलाकों से आए पुरुषों, महिलाओं और परिवारों को भी यही चिंता सता रही है।
सीमा पर तैनात अधिकारियों ने भी एसआईआर के बाद बांग्लादेश लौटने वालों की संख्या में इस बढ़ोतरी की पुष्टि की।उन्होंने बताया कि रोज 150–200 लोगों को सत्यापन के बाद हिरासत में लेकर वापस भेजा जा रहा है। कतारें चार नवंबर से बढ़नी शुरू हुईं, जिस दिन एसआईआर प्रक्रिया शुरू हुई।सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक अधिकारी ने कहा, “हम यह मान नहीं सकते कि यहां मौजूद हर व्यक्ति अपने घर लौट रहा है। सत्यापन अनिवार्य है। बायोमेट्रिक विवरण जिले के अधिकारियों और राज्य पुलिस को भेजे जाते हैं। इसमें समय लगता है।”





