सिक्किम में सुरंग ढहने से हो गई 8 की मौत, अब भी फंसे हैं 27 मजदूर; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
सिक्किम के नामची में एक जलविद्युत परियोनजा की निर्माणाधीन सुरंग ढहने से कम से कम 8 मजदूरों की मौत हो गई है। वहीं 27 से ज्यादा मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। सुरंग में जहरीली गैस की वजह से राहत-बचाव के काम में मुश्किल आ रही है।

सिक्किम के नामची में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज- 6 जलविद्युत परियोजना की एक निर्माणाधीन सुरंग ढहने से 8 मजदूरों की मौत हो गई है। वहीं कम से कम 27 मजदूर अब भी फंसे हुए हैं। उन्हें निकालने का प्रयास किया जा रहा है। शवों को पास के अस्पताल में भेजा गया है। सोमवार दोपहर को भूस्खलन के कारण एक निर्माणाधीन सड़क सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया, जिससे उसके भीतर कई मजदूर फंस गए थे।
सुरंग में गैस का भी रिसाव
पुलिस ने बताया कि भूस्खलन के कारण समरदुंग सुरंग के अंदर संदिग्ध गैस रिसाव भी हुआ है। इसने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि भूस्खलन के कारण भूमिगत परतों या चट्टानों की संरचना में हलचल होने से यह गैस प्राकृतिक रूप से निकल रही है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), एसडीआरएफ, पुलिस और अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं की टीम बचाव अभियान संचालित कर रही हैं।
अधिकारी ने कहा, "बचाव अभियान जारी है, लेकिन सुरंग के भीतर गैस की मौजूदगी के कारण यह काम जटिल हो गया है। फंसे हुए मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश के दौरान कई बचाव कर्मियों को चक्कर आ गए और वे बेहोश हो गए।" उन्होंने कहा, "एंबुलेंस को तैयार रखा गया है, जबकि गैस मास्क से लैस बचावकर्मी सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।" अधिकारियों ने बताया कि इस सुरंग का निर्माण एक राजमार्ग परियोजना के हिस्से के रूप में किया जा रहा है।
जिला अधिकारी ने बताया कि हादसे की खबर मिलने केबाद पश्चिम बंगाल से भी गैस रोधी उपकरणों के सात एक स्पेशल रेस्क्यू टीम बुलाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि सुरंग में जगह बहुत कम है और रौशनी ना के बराबर है। इसके साथ ही रिसने वाली मीथेन गैस काम और और मुश्किल कर रही है। मीथेन गैस वैसे तो जहरीली नहीं होती लेकिन यह ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है। इससे बेहोशी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गैस ज्वलनशील होती है। ऐसे में एक चिंगारी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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