
मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करेंगे सिद्धारमैया, खींचतान के बीच बेटे का दावा
सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का विश्वास जताते हुए उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने गुरुवार को कहा है कि उनके पिता के खिलाफ ना कोई शिकायत है और ना ही वह किसी घोटाले में शामिल हैं।
कर्नाटक में कुर्सी की लड़ाई अब दिलचस्प हो गई है। गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डी के शिवकुमार के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली है, जहां दोनों ने इशारों-इशारों में बड़े संकेत दे दिए हैं। यह स्पष्ट है कि जल्द ही यह खींचतान कांग्रेस आलाकमान के लिए बड़ी सिरदर्दी बन जाएगी। इस बीच सिद्धारमैया के बेटे ने बड़ा दावा कर दिया है। कर्नाटक में कांग्रेस MLC और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि है उनके पिता राज्य के मुख्यमंत्री बने रहेंगे और अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।
यतींद्र ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा है कि उनके पिता के खिलाफ ना कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज है और ना ही वह किसी घोटाले में शामिल हैं। उन्होंने कहा, "मुझे मुख्यमंत्री बदलने का कोई कारण नजर नहीं आता है। सिद्धारमैया पूर्णकालिक रूप से अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। मुझे समझ नहीं आ रहा कि नेतृत्व परिवर्तन की लगातार चर्चा क्यों हो रही है।" उन्होंने कहा "मुझे इससे पहले सत्ता साझेदारी पर किसी भी बातचीत की जानकारी नहीं है। हाईकमान का निर्णय अंतिम होता है और किसी ने मुझे ऐसी चर्चाओं के बारे में सूचित नहीं किया है।"
विधायकों की लॉबिंग पर भी बोले
दिल्ली में शिवकुमार समर्थक विधायकों की लॉबिंग की खबरों का हवाला देते हुए यतीन्द्र ने कहा कि विधायकों का दिल्ली आना कोई असामान्य बात नहीं है और अतीत में विभिन्न दलों में भी ऐसा होता रहा है। वहीं वोक्कालिगा संत निर्मलानंदनाथ स्वामीजी के इस बयान पर कि डी के शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनना चाहिए, सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह तय करेगी कि मुख्यमंत्री कौन होना चाहिए और वह इस मामले में दूसरों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहेंगे।
सिद्धारमैया vs शिवकुमार
इससे पहले CM सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान गुरुवार को वाकयुद्ध में बदल गई। शिवकुमार ने एक पोस्ट में शब्दों की ताकत को सबसे बड़ी ताकत बताया।
वहीं सिद्धारमैया ने इस पोस्ट का जवाब देते तंज कसा कि शब्दों की तब तक कोई ताकत नहीं होती, जब तक वह लोगों के जीवन को बेहतर ना बनाए। सिद्धारमैया ने आगे अपना इरादा भी बता दिया। उन्होंने लिखा, “कर्नाटक की जनता द्वारा दिया गया जनादेश क्षण भर के लिए नहीं, बल्कि पूरे पांच साल की जिम्मेदारी है।”





