
सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मांगी क्लेरिटी; कहा- CM पद पर जारी कन्फ्यूजन से काम करना मुश्किल
सिद्धारमैया ने आलाकमान को संकेत दिया है कि वे अपनी कैबिनेट का विस्तार करना चाहते हैं और खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां करना चाहते हैं। लेकिन नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच इन फैसलों पर ब्रेक लगा हुआ है।
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रहा द्वंद्व अब दिल्ली के दरबार तक पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से संपर्क कर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर स्थायी समाधान निकालने का आग्रह किया है। सिद्धारमैया का कहना है कि नेतृत्व को लेकर जारी निरंतर भ्रम के कारण शासन और कैबिनेट विस्तार के कार्यों में बाधा आ रही है।
आपको बता दें कि मंगलवार को मैसूर एयरपोर्ट पर राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच हुई संक्षिप्त मुलाकात के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। राहुल गांधी तमिलनाडु से लौटते समय मैसूर में रुके थे, जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों ने उनकी अगवानी की। हालांकि, सार्वजनिक रूप से सिद्धारमैया ने किसी भी राजनीतिक चर्चा से इनकार किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने राहुल गांधी से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस अनिश्चितता को खत्म किया जाए।
पावर शेयरिंग फॉर्मूले के कारण विवाद
कर्नाटक में मचे इस घमासान के केंद्र में वह कथित समझौता है, जो मई 2023 में सरकार गठन के वक्त हुआ था। डीके शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि हाईकमान ने 2.5 साल बाद मुख्यमंत्री पद शिवकुमार को सौंपने का वादा किया था। सरकार के ढाई साल नवंबर 2025 में पूरे हो चुके हैं, जिसके बाद से शिवकुमार खेमा सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और ऐसा कोई फॉर्मूला तय नहीं हुआ था।
सिद्धारमैया ने आलाकमान को संकेत दिया है कि वे अपनी कैबिनेट का विस्तार करना चाहते हैं और खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां करना चाहते हैं। लेकिन नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच इन फैसलों पर ब्रेक लगा हुआ है। सिद्धारमैया का मानना है कि यदि हाईकमान उन्हें पूरे कार्यकाल के लिए हरी झंडी दे देता है, तो वे अधिक मजबूती से प्रशासन चला पाएंगे।
हाईकमान की चुप्पी और खरगे का बयान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पिछले महीने इस विवाद को स्थानीय स्तर पर पैदा किया गया भ्रम बताया था। उन्होंने नेताओं को चेतावनी दी थी कि वे कर्नाटक की जीत का श्रेय व्यक्तिगत रूप से न लें। खरगे ने कहा है कि जब भी जरूरत होगी, सिद्धारमैया और शिवकुमार को चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा।
इस आंतरिक कलह पर भाजपा ने तीखा तंज कसा है। विपक्षी नेता आर. अशोक ने कहा कि जब जर्मन चांसलर बेंगलुरु के दौरे पर थे, तब मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री उनकी अगवानी करने के बजाय मैसूर में राहुल गांधी की खुशामद में लगे थे। भाजपा का आरोप है कि राज्य में प्रशासन ठप है और दोनों नेता सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की रेस में दौड़ रहे हैं।

लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
और पढ़ें



