सिद्धारमैया ने बतौर मुख्यमंत्री रिकॉर्ड किया बराबर, क्या पूरा करेंगे पांच साल का कार्यकाल
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बतौर मुख्यमंत्री एक रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उन्होंने सबसे लंबे समय तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहने के देवराज उर्स के रिकॉर्ड की मंगलवार को बराबरी कर ली।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बतौर मुख्यमंत्री एक रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उन्होंने सबसे लंबे समय तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहने के देवराज उर्स के रिकॉर्ड की मंगलवार को बराबरी कर ली। हालांकि उनके कार्यकाल पूरा करने को लेकर अभी भी अनश्चितता बनी हुई है। इन सबसे इतर सिद्धारमैया ने अपने पांच साल के कार्यकाल को पूरा करने पर भरोसा जताया है। साथ ही यह भी कहा कि जब आलाकमान उन्हें बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल फेरबदल के संबंध में चर्चा के लिए बुलाएगा तो वे उनसे इस बारे में बात करेंगे। सिद्धारमैया ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि मैंने कोई रिकॉर्ड तोड़ने के लिए राजनीति नहीं की है। यह महज एक संयोग है।
कल टूट जाएगा रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में, सिद्धारमैया ने मंगलवार, छह जनवरी को देवराज उर्स के सबसे लंबे समय (2,792 दिन) तक सेवा करने वाले कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। सात जनवरी को वह इस संख्या को पार कर लेंगे। यह अनूठा रिकॉर्ड ऐसे समय में सामने आया है जब सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष तेज हो गया है और राज्य में मुख्यमंत्री बदले जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया है। सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच 2023 में हुए समझौते ने इस अटकलबाजी को और हवा दी।
कौन थे देवराज उर्स
राज्य में सामाजिक न्याय और भूमि सुधारों के प्रतीक माने जाने वाले उर्स दो बार मुख्यमंत्री रहे - पहली बार 20 मार्च, 1972 से 31 दिसंबर, 1977 तक 2,113 दिनों के लिए और दूसरी बार 28 फरवरी, 1978 से 7 जनवरी, 1980 तक 679 दिनों के लिए। सिद्धारमैया, जो उर्स के बाद पांच साल पूरे करने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री भी हैं। अपने पहले कार्यकाल में 13 मई, 2013 से 15 मई, 2018 तक 1,829 दिनों तक पद पर रहे। अपने दूसरे कार्यकाल में, 20 मई 2023 से अब तक, उन्होंने 963 दिन पूरे कर लिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी किसी रिकॉर्ड के बारे में नहीं सोचा था और उन्होंने केवल यही सोचा था कि वे एक बार विधायक बन जाएं।
दोनों मैसूरु के रहने वाले
सिद्धारमैया ने कहा कि मैं विधायक बना, मुझे अवसर मिले, मैं मंत्री बना, उपमुख्यमंत्री बना, विपक्ष का नेता बना और मुख्यमंत्री भी बना। मुझे अवसर मिले और मैंने अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया। उन्होंने कहा कि देवराज उर्स और मैं दोनों मैसूरु से हैं, लेकिन हमारे कार्यकाल अलग-अलग रहे हैं। वे (उर्स) 1972 से 1980 तक मुख्यमंत्री रहे। मैं 2013 से 2018 और 2023 से अब तक दो बार मुख्यमंत्री रह चुका हूं। आगे, आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, वही होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी लंबी राजनीतिक यात्रा से वह संतुष्ट हैं और जनता की सेवा करना उन्हें खुशी देता है। उन्होंने कहा कि राजनीति का अर्थ है गरीबों, दलितों, पिछड़ों के लिए न्याय करना और उनके हितों की रक्षा करना।
नाटी कोली व्यंजन से संबंध
सिद्धारमैया के प्रशंसकों ने अपने नेता की इस उपलब्धि का जश्न कई स्थानों पर दावतों का आयोजन करके मनाया। इसमें उनके पसंदीदा ‘नाटी कोली’ (देसी मुर्गा) से बने व्यंजन परोसे गए। क्या वह ‘नाटी कोली’ व्यंजनों के एक तरह के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं? इस सवाल के जवाब में सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्हें यह पता है कि दावतों का आयोजन कौन कर रहा है। उन्होंने कहा कि मैं एक गांव से हूं और हमारे गांव में आमतौर पर रिश्तेदारों के आने पर नाटी कोली बनाई जाती थी, इसलिए मैं पहले नाटी कोली और रागी मुड्डे खाता था, अब थोड़ा कम खाता हूं। गांव के कई लोगों को यह मेरी तरह पसंद है, लेकिन चूंकि मैं मुख्यमंत्री हूं, इसलिए इसे थोड़ा प्रचार मिल रहा है।



