हिंदू त्योहारों को क्यों सेक्युलर करना, गरबा में मुसलमान के मुद्दे पर बोले शहजाद पूनावाला
शहजाद पूनावाला लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रहे थे। उन्होंने हाल ही में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने भी गरबा में मुसलमानों की एंट्री को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

गरबा महोत्सवों में मुसलमान समुदाय की एंट्री को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है। इस पर भारतीय जनता पार्टी छोड़ चुके शहजाद पूनावाला ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि क्यों सभी हिंदू त्योहारों को सेक्युलर करने की कोशिश की जा रही है? साथ ही कहा है कि गरबा में जाने के लिए गलत पहचान रखने की क्या जरूरत है। खास बात है कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतीश राणे ने मुसलमानों की एंट्री पर रोक लगाने की बात कही थी। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की बात का समर्थन किया था।
पूनावाला ने लिखा, 'क्या मुसलमानों को गरबा में जाने की अनुमति मिलनी चाहिए? गरबा नवरात्रि के दौरान गरबा का एक पवित्र धार्मिक केंद्र है। मां अंबा, उनकी पूजा और उनकी परंपराएं। इसे सिर्फ एक डांस पार्टी कहना, उस चीज को नजरअंदाज करना है, जिसे भक्त मना रहे हैं। अगर आप मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते, तो क्या आप इस पूजा में शामिल हो सकते हैं?'
उन्होंने कहा कि हिंदू त्योहारों को समावेशी कहलाने के लिए अपना धार्मिक चरित्र छोड़ने के लिए क्यों कहा जाता है। उन्होंने कहा, 'सभी हिंदू त्योहारों को सेक्युलर बनाने के लिए क्यों मजबूर किया जाता है? दिवाली, होली और अब यह? धार्मिक स्वरूप में बदलाव क्यों किया जाए? और गरबा में शामिल होने के लिए झूठी पहचान क्यों अपनाई जाए?'
पूनावाला ने अगस्त में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। वह लंबे समय तक पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे और टीवी डिबेट्स में नजर आते रहे थे। उन्होंने पार्टी छोड़ने की वजह आर्थिक और व्यक्तिगत बताई थी। फिलहाल, वह राजनीति से दूर रहने की बात कह रहे हैं।
VHP के ऐलान के बाद छिड़ा मुद्दा
विश्व हिंदू परिषद ने कहा था कि महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया में मुसलमानों की एंट्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। साथ ही आयोजन स्थल पर प्रवेश करने के लिए आधार दिखाना होगा और माथे पर तिलक सुनिश्चित किया जाएगा। इस पर भाजपा नेता राणे ने सहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि एंट्री लेने से पहले पहचान की पुष्टि करानी होगी और हनुमान चालीसा का पाठ भी करना होगा।
उन्होंने कहा था, 'जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते, उन्हें हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होना चाहिए। गरबा में आने वालों को प्रवेश मिलने से पहले अपनी पहचान दिखानी होगी और हनुमान चालीसा का पाठ करना होगा।' उन्होंने कहा, 'अगर गणेश उत्सव के दौरान डीजे बजाने की इजाज़त नहीं है, तो ईद के जुलूसों पर भी वैसी ही पाबंदियां लागू होनी चाहिए।'
अमृता फडणवीस के बयान पर बवाल
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के बयान पर बवाल मच गया है। उन्होंने कहा था, 'अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति भी वहां आता है और ठीक से त्योहार का आनंद लेता है, तो मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं दिखता।' खबरें हैं कि भाजपा ने उनके इस बयान से दूरी बना ली है।
वार्ता के अनुसार, प्रवक्ता नवनाथ बन ने आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि गरबा और नवरात्रि केवल हिंदू धार्मिक त्योहार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से लव जिहाद जैसी गतिविधियों के जरिए हिंदू बहनों-बेटियों को निशाना बनाने के मामले सामने आए हैं, जिसका विरोध करना और ऐसे तत्वों को आयोजनों से दूर रखना पार्टी के लिए जरूरी है।


