
बीजेपी का ऑफिस ही कहीं और शिफ्ट कर लेते, 40 पेड़ काटने पर भड़क गया सुप्रीम कोर्ट
हरियाणा के करनाल में बीजेपी कार्यालय की ओर जाने वाली सड़क चौड़ी करने के लिए 40 पेड़ काटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को बुरी तरह फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने 40 हरे पेड़ों को काटने को लेकर हरियाणा के करनाल प्रशासनहर को जमकर फटकार लगाई है। बताया गया कि बीजेपी के कार्यालय की ओर जाने वली सड़क चौड़ी करने के लिए कम से कम 40 हरे पेड़ों का काट दिया गया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि राजनेताओं की सुविधा के लिए इस तरह का कदम उठाना बेहद हैरान करने वाला है। हरियाणा शहरी विकास परिषद की ओर से कोर्ट में पेश हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बैनर्जी ने कहा कि जवाब देने के लिए उन्हें कुछ समय दिया जाए।
पर्यावरण के प्रति लापरवाही- सुप्रीम कोर्ट
वहीं जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि आखिर इस तरह से पेड़ काटने की जरूरत क्या थी? उन्होंने कहा कि क्या राज्य के पास इस तरह से पेड़ काटने का अधिकार है। वहीं बैनर्जी ने कहा कि ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए ये 40 पेड़ काटे गए थे। याचिकाकर्ता कर्नल देवेंद्र सिंह राजपूत के वकील ने कहा कि जिस रोड के किनारे के पेड़ काटे गए हैं वह सीधी बीजेपी ऑफिस तक जाती है। इसके बाद बेंच ने कहा कि यह पर्यावरण के प्रति लापरवाही का उदाहरण है।
जस्टिस पारदीवाला ने कहा, यह बहुत ही क्रूर कदम था। यह और भी हैरान करने वाला है कि प्रशासन ने एक राजनीतिक कार्यालय तक पहुंचने के लिए ग्रीन बेल्ट ही खत्म कर दी। उन्होंने कहा, अगर ऑफिस के लिए चौड़ा रास्ता चाहिए था तो कार्यालय ही और कहीं शिफ्ट कर लेते। बैनर्जी ने कहा कि राज्य इस नुकसान की भरपाई करेगा। इसपर जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि पेड़ों का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा, भरपाई से क्या मतलब है? आप एक पेड़ की जान ले लेते हैं तो आखिर भरपाई किसके लिए करेंगे। हम इसे बहुत गंभीरता से लेंगे। आपको 40 पेड़ इस तरह से नहीं काटने चाहिए थे। वहीं बैनर्जी ने कहा कि यह कदम स्थानीय लोगों के दबाव के चलते उठाया गया है। जज ने कहा, अच्छा, क्या हमें स्थानीय लोगों से भी पूछना पड़ेगा।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह से पेड़ काटना परिषद के अधिकार में नहीं है। उन्होंने कहा, यह सड़क सेक्टर रोड और नेशनल हाइवे के बीच लिंक रो थी। ऐसे में इसके बारे में फैसला नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को करना चाहिए था। कोर्ट ने कहा, सरकार इन 40 पेड़ों के लिए जिम्मेदार है। कोर्ट ने HSVP से दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है।





