गजब! शराब की बोतल लेकर कोर्ट पहुंचा हत्या का आरोपी, जज साहब का चढ़ गया पारा

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, बेंगलुरु
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी ट्रायल कोर्ट परिसर में शराब की बोतल लेकर पहुंचा था, जिसका CCTV फुटेज सामने आने के बाद जज ने कड़ी फटकार लगाई।

गजब! शराब की बोतल लेकर कोर्ट पहुंचा हत्या का आरोपी, जज साहब का चढ़ गया पारा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, आरोपी को ट्रायल कोर्ट परिसर के अंदर शराब की बोतल के साथ देखा गया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जज ने कड़ी टिप्पणी की और कहा कि 'उसे जेल में ही रहने दो, वह इस लत से बाहर आ जाएगा।'

जज ने कहा- 'उसे कुछ और दिन जेल में ही रहने दें'

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस केवी अरविंद की वेकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को कोई भी राहत देने से मना कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कई अहम बातें कहीं। बेंच ने कहा कि सुनवाई की तारीख पर याचिकाकर्ता अदालत परिसर में शराब की बोतल के साथ मौजूद था। यह बात सीसीटीवी फुटेज में सामने आई है। यह महज एक आरोप नहीं है, बल्कि पीठासीन अधिकारी ने खुद यह वीडियो देखा है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, "याचिकाकर्ता शराब की बोतल लेकर कोर्ट जाता है, लेकिन जब उसका मामला पुकारा जाता है तो वह पेश नहीं हो पाता? अगर ऐसा है, तो क्या किया जा सकता है? इसीलिए निचली अदालत ने उसकी जमानत रद्द की थी।"

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि, "उसे कुछ और समय तक जेल में ही रहने दें, उसकी लत छूट जाएगी। हम एक महीने बाद इस पर विचार करेंगे। उसे एक महीने और वहीं रहने दो, कुछ नहीं होगा। अगर किसी आम आदमी ने यह आरोप लगाया होता, तो इसे अलग नजरिए से देखा जा सकता था, लेकिन यह वीडियो खुद पीठासीन अधिकारी ने देखा है।"

क्या है पूरा मामला?

27 वर्षीय शिवकुमार उर्फ शिवू उर्फ आरएक्स शिवू हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी है। आरोप है कि वह ट्रायल कोर्ट की सुनवाई के दौरान जानबूझकर गैरहाजिर रहा और कोर्ट परिसर में शराब की बोतल लेकर पहुंच गया था।

अदालत के नियमों के उल्लंघन पर ट्रायल कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी और उसे वापस कस्टडी में भेज दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए और जमानत मांगने के लिए उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

वकील की दलील पर जज की नसीहत

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने बचाव में कोर्ट के सामने कुछ तर्क रखे। वकील ने दलील दी कि जमानत रद्द करने से पहले ट्रायल कोर्ट को नोटिस जारी कर आरोपी को अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए था।

वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता पेशे से एक किसान है और वह पहले ही एक महीना जेल में काट चुका है। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि सिर्फ सीसीटीवी फुटेज के जरिए यह कैसे तय किया जा सकता है कि वह शराब ही पी रहा था?

इस पर जस्टिस अरविंद ने वकील को नसीहत देते हुए कहा, "अदालत के एक अधिकारी के रूप में आपको ऐसे बर्ताव को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। बचाव करना आपका पेशा है, लेकिन अदालत की गरिमा को लेकर कुछ गंभीरता भी होनी चाहिए।" अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में तय की गई है।

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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