अपराध की दुनिया में सांसद! 326 MPs और 14 मुख्यमंत्रियों पर दर्ज मामले, ये राज्य सबसे आगे

भाषा, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। सांसदों-विधायकों के 4,192 मामले अभी लंबित हैं।

326 सांसदों पर आपराधिक केस, 14 मुख्यमंत्रियों पर भी मुकदमे; सुप्रीम कोर्ट में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा
326 सांसदों पर आपराधिक केस, 14 मुख्यमंत्रियों पर भी मुकदमे; सुप्रीम कोर्ट में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा

राजनीति में अपराधीकरण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

न्यायालय में वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने एक हलफनामा दायर किया है। उन्हें सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) में 'न्यायमित्र' (अदालत की मदद करने वाला वकील) नियुक्त किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।

28 में से 14 CM के खिलाफ मामलों का अंबार

हलफनामे में कहा गया है कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले दर्ज हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (29 मामले) और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (19 मामले) हैं।

हंसारिया ने कहा कि मुकदमों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की निगरानी के बावजूद, 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है।

अलग-अलग उच्च न्यायालय से आंकड़े इकट्ठा करके, न्यायमित्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया, जबकि उसी साल 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि पूर्व और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 मामले लंबित हैं।

170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी

लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

हलफनामे में 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 (33 प्रतिशत) सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 40 (18 प्रतिशत) मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

वरिष्ठ वकील ने अलग-अलग उच्च न्यायालय की तरफ से दाखिल रिपोर्ट का विश्लेषण भी जमा किया। इसमें उत्तर प्रदेश शामिल नहीं था क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कोई रिपोर्ट नहीं मिली थी।

केरल-तेलंगाना का तो हार बुरा है

वकील स्नेहा कलिता के जरिए दाखिल हलफनामे के मुताबिक, केरल के 20 में से 19 सांसदों (95 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले दर्ज थे और उनमें से 11 पर गंभीर मामले थे।

तेलंगाना के 17 सांसदों में से 14 (82 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले थे; ओडिशा में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत (21 में से 16), झारखंड में 71 प्रतिशत (14 में से 10) और तमिलनाडु में 67 प्रतिशत (39 में से 26) था। वहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य बड़े राज्यों के लगभग 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज थे।

हरियाणा, छत्तीसगढ़ में केवल एक

हरियाणा (10 सांसद) और छत्तीसगढ़ (11 सांसद) में से सिर्फ एक-एक सांसद पर आपराधिक मामले हैं; पंजाब में 13 में से दो, असम में 14 में से तीन, दिल्ली में सात में से तीन, राजस्थान में 25 में से चार, गुजरात में 25 में से पांच और मध्य प्रदेश में 29 में से नौ सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।

न्यायमित्र ने इस बात पर जोर दिया है कि सांसद/विधायक के खिलाफ आपराधिक मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए उच्चतम न्यायालय को उन पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सांसद/विधायक के लिए तय की गई विशेष अदालत सिर्फ सांसद/विधायक के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई करें और जब इन मामलों की सुनवाई पूरी हो जाए, तभी दूसरे मामलों को लिया जाए। हंसारिया, विधि निर्माताओं के खिलाफ मामलों के जल्द निस्तारण के लिए अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में न्यायालय की मदद कर रहे हैं।

Amit Kumar

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