अयोध्या मामले की शिवसेना केस से तुलना क्यों, उद्धव गुट के सांसद ने सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल
शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी की घटना की तुलना शिवसेना-यूबीटी सांसदों के केस से की है। उनकी यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें स्वतंत्र जांच की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है।

शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी की घटना की तुलना शिवसेना-यूबीटी सांसदों के केस से की है। उनकी यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें स्वतंत्र जांच की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है। अरविंद सावंत ने कहाकि अगर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कहा है तो इसका स्वागत है, लेकिन याद रखिए सुप्रीम कोर्ट शिवसेना सांसदों के मामले में चार साल ले लिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहाकि सुप्रीम कोर्ट को यह सवाल भी पूछना चाहिए कि क्या चंदा चोरी केस में एफआईआर दर्ज हुई है?
अरविंद सावंत ने क्या कहा
शिवसेना सांसद ने सवाल उठाते हुए कहाकि क्या चंदा चोरी केस में बिना एफआईआर दर्ज किए ही एसआईटी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहाकि शिवसेना सांसदों के मामले में तो सुप्रीम कोर्ट को तय करने में चार साल लग गए। सुप्रीम कोर्ट को नहीं लगता कि इससे संविधान प्रभावित हुआ है? शिवसेना सांसद चले गए, केस चलता रहा और समय बीत गया। सरकार ने भी ढाई साल का समय पूरा किया और उनका कार्यकाल भी खत्म हो गया।
कब होनी है सु्प्रीम कोर्ट में सुनवाई
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। सात जुलाई को अयोध्या की एक अदालत ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दी थी। अदालत ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की पुलिस रिमांड मंजूर की थी। इससे पहले 29 जून को स्थानीय अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
बेंच में कौन-कौन शामिल
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच सोमवार को अदालत की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। तीन याचिकाकर्ताओं में से एक नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया है। दूसरी याचिका अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दायर की है, जिसमें इसी तरह के अनुरोध किए गए हैं।
याचिकाओं में कहा गया है
वहीं, तीसरी याचिका राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने दायर की है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच के साथ-साथ ट्रस्ट के पूरे वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने एक याचिकाकर्ता से मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए बाद की किसी तारीख पर सूचीबद्ध कराने का आग्रह करने को कहा था।
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं सहित अन्य कथित अनियमितताओं की जांच कराई जानी चाहिए। अजय कुमार राय ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को आवश्यक नियामक, निगरानी और ऑडिट तंत्र गठित एवं लागू करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया है, ताकि जनहित की रक्षा हो सके और करोड़ों श्रद्धालुओं एवं दानदाताओं का विश्वास कायम रहे।


