मैं चुप नहीं, जल्द लौटूंगी बांग्लादेश; भारत से ही शेख हसीना ने भरी हुंकार
शेख हसीना ने कहा कि उनकी नामौजूदगी का मतलब यह नहीं कि वह शांत हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही उनकी बांग्लादेश वापसी होगी और लोकतांत्रिक मूल्यों को फिर बहाल किया जाएगा। हसीना ने कहा कि आवामी लीग ना होती तो बांग्लादेश का जन्म ही नहीं होता।

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि बीएनपी की सरकार अगर कुछ दिन और रही तो फिर से काले दिनों की शुरूआत हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 2001 से 2006 के दौरान जिस तरह से कट्टरपंथी ताकतें और आतंकियों के अच्छे दिन आ गए थे, एक बार फिर वैसी ही परिस्थिति बनने वाली है। एक ईमेल इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि वह जल्द ही बांग्लादेश लौटेंगी।
शेख हसीना ने कहा कि उनके लौटते ही लोकतांत्रित अधिकार फिर से बहाल हो जाएंगे। बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी को बैन कर दिया गया है। वहीं बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्राइब्यूनल ने शेख हसीन को मौत की सजा सुनाई है। शेख हसीना से सवाल किया कि भारत में स्व निर्वासन में रहने के बाद जिस तरह से 17 मई 1981 को उन्होंने बांग्लादेश में वापसी की थी, क्या इस बार भी कुछ ऐसा ही होने वाला है।
शेख हसीना ने कहा कि 17 मई का दिन मेरे लिए भावना से जुड़ा हुआ है। 6 साल के निर्वासन के बाद मैं बांग्लादेश लौटी थी। मैंने अपने माता-पिता. भाई और रिश्तेदारों को खो दिया था। हालांकि बांग्लादेश के लोगों ने मुझे बहुत प्यार दिया। मेरे खिलाफ बहुत सारी साजिशें की गईं लेकिन कोई सफल नहीं हो पाया।
कब लौटेंगी शेख हसीना?
शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश लौटने की कोई निश्चित तारीख और समय नहीं बताया जा सकता है। हम लोग लगातार बांग्लादेश में लोकतांत्रिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हम चाहतेहैं कि बांग्लादेश में बोलने की आजादी और राजनीतिक अधिकार फिर सुनिश्चित किए जाएँ। यह मेरे लौटने के लिए ही नहीं बल्कि देश की अखंडता और संप्रभुता के लिए भी जरूरी है।
मेरी नामौजूदगी का मतलब चुप्पी नहीं
शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में मेरी नामौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि हम लोग शांत बैठे हैं। हर क्षण हम लोग बांग्लादेश के लिए काम कर रहे हैं। मुझपर 19 बार जानलेवा हमले हो चुके हैं और फिर भी कोई मुझे रोक नहीं पाया। ईश्वर ने मुझे बचाए रखा। मैं जल्द ही बांग्लादेश की धरती पर वापसी करूंगी। उन्होंने कहा कि आवामी लीग जनता की पार्टी है। यह बंदूकों के बल पर नहीं खड़ी हुई है। किसी भी बैन से आवामी लीग को खत्म नहीं किया जा सकता है। अगर आवामी लीग ना होती तो बांग्लादेश का जन्म ही ना होता। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस की अगुआई वाली अंतरिम सरकार में आवामी लीग के समर्थकों की हत्या करवाई गई थी।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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