
सोनिया जी ने भी तो दी थी कुर्बानी…सिद्धा के सामने DKS ने साधे एक तीर से 2 निशाने, कर्नाटक में ट्विस्ट
शिवकुमार ने एक मंच पर बोलते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने 20 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में काम किया। बावजूद इसके उन्होंने अपनी ताकत कुर्बान कर दी थी, जब पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने उन्हें भारत का अगला PM बनने का प्रस्ताव दिया था।
Karnataka Row: कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मची सियासी खींचतान आज (शुक्रवार, 28 नवंबर) को तब और तेज हो गई, जब सीएम के सामने ही उनके डिप्टी सीएम ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की कुर्बानी का उदाहरण दिया। बेंगलुरु में एक सरकारी कार्यक्रम में शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने 2004 में पार्टी के नेतृत्व वाले यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) के 2004 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री बनने का मौका छोड़ दिया था। डीकेएस ने कहा कि इसके बजाय उन्होंने मनमोहन सिंह को आगे बढ़ाया, जो एक बेहतरीन अर्थशास्त्री थे, जो पहले रिज़र्व बैंक के गवर्नर और वित्त मंत्री के तौर पर काम कर चुके थे।
डीके शिवकुमार के इस बयान का राजनीतिक गलियारों में नए संकेत तलाशे जा रहे हैं। समझा जा रहा है कि DKS सोनिया गांधी के त्याग का उदाहरण देकर सिद्धरमैया से भी वैसा ही आचरण करने की अपेक्षा कर रहे हैं। डीके शिवकुमार ने मंच से कहा कि सोनिया गांधी जी ने 20 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में काम किया था। बावजूद इसके उन्होंने अपनी ताकत कुर्बान कर दी। उन्होंने कहा कि 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद जब तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने सोनिया गांधी को भारत का प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया था तो उन्होंने वह पद लेने से मना कर दिया था और खुद पीएम बनने की बजाय मनमोहन सिंह को अगला प्राइम मिनिस्टर बनने का सुझाव दिया था, जो अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ थे और देश का विकास कर सकते थे। उनके जरिए ही आशा वर्कर्स की स्कीमें लागू हुई हैं।
एक तीर से दो निशाने कैसे?
डीके शिवकुमार ने त्याग की बात कर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला तो उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी सीएम सिद्धारमैया को सोनिया गांधी से सीखने और उनकी तरह त्याग करने की नसीहत दे डाली है, वहीं दूसरी तरफ सोनिया गांधी के त्याग की चर्चा कर उन्होंने गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन किया है। वैसे भी समझा जा रहा है कि इस प्रकरण में गांधी परिवार और कांग्रेस आलाकमान सिद्धा के उस बयान से अंदरखाने नाराज है, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वह पूरे पांच साल तक का कार्यकाल पूरा करेंगे।
DKS पहुंच रहे दिल्ली
बता दें कि मई 2023 में जब कर्नाटक विघानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत हुई थी और मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच अंदरूनी मुकाबला होने लगा तब पार्टी आलाकमान ने शक्ति संतुलन के तहत सिद्धा को सीएम और डीके को डिप्टी सीएम बनाया था। उसी दौरान यह खबर भी आई कि कथित तौर पर दोनों के बीच सीएम पोस्ट को लेकर एक फार्मूला बनाया गया है कि ढाई-ढाई साल के लिए दोनों रोटेशनल मोड में सीएम की कुर्सी संभालेंगे। हालांकि, कांग्रेस ने कभी इसकी पुष्टि नहीं की और सिद्धा ने भी इसे हमेशा खारिज किया। अब जब सिद्धा सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं, तब फिर से यह विवाद उठ खड़ा हुआ है। इस बीच, कहा जा रहा है कि शिवकुमार शुक्रवार की शाम दिल्ली पहुंच रहे हैं।





