पहले ही काफी बदनामी हो चुकी है; 'भारत बंद' के बीच शशि थरूर ने किसे सुनाया?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत बंद का आह्वान करने वाले यूनियन्स की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे उग्र यूनियनवादी आंदोलनों से आगे बढ़ चुकी है। केरल को भी इससे आगे बढ़ जाना चाहिए।

Shashi Tharoor: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए लेबर कोड्स के विरोध में ट्रेड यूनियन द्वारा बुलाए गए भारत बंद का कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विरोध किया है। इस बंद से सबसे ज्यादा प्रभावित केरल ही रहा है। राजधानी तिरुअनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि इस तरह के आंदोलनों की वजह से पहले ही केरल की काफी बदनामी हो चुकी है। इस उग्र यूनियनवाद, जिसे दुनिया के बाकी देशों यहां तक की भारत के बाकी राज्यों ने भी त्याग दिया है, लेकिन केरल लगातार इसे अपनाए हुए है। इसकी वजह से उद्योग धंधे भी राज्य से दूर हो रहे हैं।
ट्रेड यूनियन द्वारा बुलाए गए भारत बंद का विरोध करते हुए थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन अवरोध का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने लिखा, "इन उग्रयूनियन वादी आंदोलन की वजह से पहले ही केरल की छवि को काफी नुकसान पहुंच चुका है। ऐसी परिस्थिति और ऐसे यूनियनवादी आंदोलनों के बाद हम अपने राज्य को आधुनिक और निवेश के अनुकूल बनाने की आकांक्षा नहीं रख सकते। इस तरह के आंदोलनों को दुनिया नकार चुकी है।"
थरूर ने इस बंद को दुखद विडंबना करार देते हुए कहा कि आज का भारत बंद केवल केरल बंद बनकर रह गया है। उन्होंने कहा, “भारत का बाकी हिस्सा ऐसे उग्र यूनियन वादी व्यावधानों से काफी आगे बढ़ चुका है, लेकिन केरल अभी भी संगठित अल्पसंख्यकों द्वारा बहुसंख्यकों को बंधक बनाने की स्थिति में फंसा हुआ है।” बात को आगे बढ़ाते हुए थरूर ने कहा, "राजनीति में आने के बाद मेरा रुख लगातार एक जैसा रहा है। मैं लोकतंत्र में विरोध करने के अधिकार का समर्थन करता हूं। लेकिन अवरोध पैदा करने के अधिकार का नहीं। किसी बी भारतीय को दूसरे की स्वतंत्र आवाजाही को रोकने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।"
उग्र यूनियनवाद की वजह से राज्य से दूर गए उद्योग-धंधे: थरूर
केरल में घटते उद्योग धंधों के लिए भी कांग्रेस सांसद ने उग्र यूनियनवाद को ही जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "हमने अपने उग्र यूनियनवाद से उद्योगों को राज्य से दूर कर दिया है। अब इन पुरातन ‘मसल पावर’ के तरीकों से, जो नागरिकों को उनके ही घरों में कैद कर देते हैं और दुकानदारों को जबरन शटर बंद करने पर मजबूर करते हैं, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारा राज्य युवाओं और उद्यम के लिए अनुकूल न रहे।”
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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