
बदले-बदले से शशि थरूर, क्या कांग्रेस लीडरशिप से सब हो गया ठीक? क्यों लग रही अटकलें
पिछले कई दिनों से शशि थरूर और कांग्रेस लीडरशिप में अनबन की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब थरूर बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। उन्होंने जहां मनरेगा की जगह आए जी राम जी बिल का विरोध किया तो अब राहुल गांधी की पोस्ट को भी साझा किया है।
लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पार्टी लीडरशिप के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद शशि थरूर ने मोदी सरकार के कामकाज की कई बार तारीफ भी की। इस बीच, वे कांग्रेस लीडरशिप के नेतृत्व वाली बैठकों से दूर रहते थे, जिससे उनके नाराज होने की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि, अब उनके तेवर बदले-बदले नजर आने लगे हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से थरूर ने कांग्रेस के पक्ष में खुलकर बोलना शुरू कर दिया है और अब उन्होंने राहुल गांधी के पोस्ट को भी शेयर किया है।
थरूर ने कौन सा पोस्ट किया साझा?
थरूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर काफी एक्टिव रहते हैं। आमतौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पोस्ट्स को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर करते रहते हैं, लेकिन थरूर ने पिछले कुछ मौकों पर ऐसा नहीं किया था। इससे अटकलों को और बल मिल गया। अब थरूर ने राहुल गांधी के पोस्ट को साझा करते हुए मनरेगा पर कांग्रेस का समर्थन किया है। थरूर ने अपने पोस्ट में लिखा, ''मनरेगा योजना भारत की महान विकास कहानियों में से एक रही है और यह हमारे ग्रामीण गरीबों के लिए एकमात्र सोशल सेफ्टी नेट प्रदान करती है। इसे खत्म करना एक पीछे जाने जैसा कदम है जिसे वापस लेना चाहिए।''
राहुल गांधी ने क्या लिखा था, जिसे थरूर ने शेयर किया?
दरअसल, मोदी सरकार ने मनरेगा योजना को खत्म करके उसकी जगह वीबी-जीरामजी बिल लेकर आई है। इसे पहले लोकसभा और फिर बीते दिन राज्यसभा से भी हरी झंडी मिल गई। कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ''कल रात, मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के बीस साल खत्म कर दिए। VB–G RAM G MGNREGA का 'सुधार' नहीं है। यह अधिकार-आधारित, मांग-आधारित गारंटी को खत्म कर देता है और इसे एक राशन वाली योजना में बदल देता है जिसे दिल्ली से कंट्रोल किया जाता है। यह डिजाइन से ही गांव-विरोधी है।''

'शोषण और मजबूरी में पलायन कम हुआ'
उन्होंने आगे लिखा, ''मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को मोलभाव करने की ताकत दी। असली विकल्पों के साथ, शोषण और मजबूरी में पलायन कम हुआ, मजदूरी बढ़ी, काम करने की स्थिति में सुधार हुआ, और साथ ही ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और पुनरुद्धार भी हुआ। यह वही ताकत है जिसे यह सरकार तोड़ना चाहती है। काम को सीमित करके और इसे मना करने के और तरीके बनाकर, VB–G RAM G उस एकमात्र साधन को कमजोर करता है जो ग्रामीण गरीबों के पास था। हमने देखा कि कोविड के दौरान मनरेगा का क्या मतलब था। जब अर्थव्यवस्था बंद हो गई और आजीविका खत्म हो गई, तो इसने करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज में डूबने से बचाया। और इसने महिलाओं की सबसे ज्यादा मदद की - साल दर साल, महिलाओं ने आधे से ज्यादा मानव-दिवस में योगदान दिया है। जब आप किसी रोज़गार कार्यक्रम में राशनिंग करते हैं, तो महिलाएं, दलित, आदिवासी, भूमिहीन मजदूर और सबसे गरीब ओबीसी समुदाय सबसे पहले बाहर हो जाते हैं।''
हाल के समय में बदले अंदाज में दिखे थरूर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी सरकार की तारीफ करने वाले थरूर में पिछले कुछ दिनों में बदलाव देखने को मिला है। केरल में हुए निकाय चुनाव में तिरुवनंतपुरम को लेकर भले ही उन्होंने भाजपा की तारीफ की, लेकिन उसके बाद उन्होंने कई मौकों पर कांग्रेस का समर्थन किया। बुधवार को थरूर ने परमाणु ऊर्जा विधेयक में विभिन्न खामियों का उल्लेख करते हुए लोकसभा में दावा किया कि इसमें रेडियोधर्मी पदार्थों के विकिरण और परमाणु अपशिष्ट से उत्पन्न होने वाले जोखिम को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने ‘भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन (शांति) विधेयक, 2025’ पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यह विधेयक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के बारे में स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत नहीं करता और इस संबंध में अनिश्चितता को गहराता है कि भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र किस ओर जा रहा है।
केरल फिल्म फेस्टिवल पर क्या बोले थरूर
इतना ही नहीं, थरूर ने 12 से 19 दिसंबर तक यहां आयोजित हो रहे केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफके) में 19 फिल्मों के प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी न मिलने की भी आलोचना की। थरूर ने मंजूरी से इनकार को 'सिनेमाई अशिक्षा' और ‘नौकरशाही की अत्यधिक सतर्कता’ करार दिया। थरूर ने दावा किया कि उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से फिल्मों के प्रदर्शन की अनुमति देने का आग्रह किया है। थरूर ने मनरेगा की जगह लाए गए जी राम जी बिल पर भी लोकसभा में बोलते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने देव आनंद की मशहूर फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के एक गीत का उल्लेख करते हुए सत्तापक्ष पर कटाक्ष किया कि ‘‘देखो ओ दीवानो तुम ये काम न करो, राम का नाम बदनाम ना करो।’’

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
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