भारत के खिलाफ जहर उगल अपना ही नुकसान करा रहे बांग्लादेशी, शशि थरूर ने क्यों किया अटल जी का जिक्र
शशि थरूर ने कहा कि बांग्लादेश में जारी हिंसा के कारण दो वीज़ा केंद्र बंद करने पड़े हैं, जो निराशाजनक है क्योंकि जो बांग्लादेशी भारत आना चाहते हैं, वे ही शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें पहले की तरह आसानी से वीज़ा नहीं मिल रहा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बांग्लादेश को साफ-साफ चेताया है कि भारत के खिलाफ जहर उगलकर और हिंसक विरोध प्रदर्शन कर वहां के लोग आम बांग्लादेशियों की मदद करने की क्षमता को सीमित कर रहे हैं। यानी भारत के खिलाफ बयानबाजी कर बांग्लादेशी अपना ही नुकसान करवा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक मशहूर कथन का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि भूगोल को बदला नहीं जा सकता। दरअसल, वाजपेयी जी पड़ोसी देशों के साथ कटु संबंधों से जुड़े सवालों पर अक्सर यह कहा करते थे कि भूगोल को बदला नहीं जा सकता। यानी पड़ोसी नहीं बदले जा सकते।
कट्टरपंथी इस्लामिक नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा, आगजनी और विरोध प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है। राजधानी ढाका की सड़कों पर बढ़ते विरोध-प्रदर्शन, हिंसा, आगजनी और मीडिया हाउसों पर हमलों के बीच नई दिल्ली और ढाका के बीच तल्ख होते राजनयिक रिश्तों पर थरूर ने कहा कि इस अशांति के तत्काल और दूरगामी दोनों प्रभाव होंगे। उन्होंने कहा, "हिंसा के कारण, उन्हें दो वीज़ा केंद्र बंद करने पड़े हैं, जो निराशाजनक है क्योंकि जो बांग्लादेशी भारत आना चाहते हैं, वे ही शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें पहले की तरह आसानी से वीज़ा नहीं मिल रहा है।" थरूर ने कहा, “ये हालात हमारी सरकार के लिए उनकी मदद करना मुश्किल बना रहे हैं।”
उम्मीद है हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे
उन्होंने कहा, “हालांकि, मुझे उम्मीद है कि हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे और मैं बांग्लादेश के लोगों और सरकार से अपने पड़ोसी के साथ इस करीबी रिश्ते को ज़्यादा अहमियत देने का आग्रह करूंगा। जैसा कि वाजपेयी साहब ने पाकिस्तान के बारे में मशहूर तौर पर कहा था, हम अपना भूगोल नहीं बदल सकते। हम जहाँ हैं, वहीं हैं, वे जहाँ हैं, वहीं हैं। उन्हें हमारे साथ काम करना सीखना चाहिए।”
नई दिल्ली घटनाओं पर करीब से नज़र रखेगी
कांग्रेस सांसद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई दिल्ली घटनाओं पर करीब से नज़र रखेगी। उन्होंने कहा, "सरकार को स्थिति पर बहुत सावधानी से नजर रखनी होगी और कहा कि ढाका में भारतीय अधिकारी बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत करेंगे।" बता दें कि बांग्लादेश में हिंसा की नई लहर का तात्कालिक कारण इंकलाब मंचो सांस्कृतिक समूह के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत है, जिसकी गुरुवार देर रात सिंगापुर के एक अस्पताल में एक हफ्ते तक ज़िंदगी की जंग लड़ने के बाद मौत हो गई।

हादी को पिछले शुक्रवार गोली मार दी गई थी
हादी को पिछले शुक्रवार को ढाका की सड़कों पर रिक्शे में जाते समय गोली मार दी गई थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों ने उनका पीछा किया; एक ने गोली चलाई और फिर दोनों मौके से फरार हो गए। ढाका में शुरुआती इलाज के बाद, हादी को गंभीर हालत में सिंगापुर ले जाया गया। कई दिनों बाद चोटों के कारण गुरुवार को उनकी मौत हो गई। हादी भारत और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना दोनों के कड़े आलोचक थे। हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद बने इंकलाब मंचो ग्रुप ने बार-बार सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और कैंपेन आयोजित किए हैं, जिसमें उनके शासन और बांग्लादेश में भारत के प्रभाव की निंदा की गई है।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




