NDA में आ सकते हैं शरद पवार! 2014 में आते तो बन चुके होते राष्ट्रपति: केंद्रीय मंत्री का बड़ा दावा
महाराष्ट्र की राजनीति में यह नया उबाल तब सामने आया है, जब ऐसी चर्चा है कि शरद पवार की अगुवाई वाली NCP केंद्र के सत्ताधारी गठबंधन NDA में शामिल हो सकती है। पिछले दिनों एकनाथ शिंदे और शरद पवार की मुलाकात से MVA में तनातनी बढ़ गई है।

नरेंद्र मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि वरिष्ठ नेता और NCP के संस्थापक शरद पवार को भाजपा की अगुवाई वाले सत्ताधारी गठबंधन यानी NDA में लाने की कोशिश हो रही है और वह NDA में आ सकते हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने ये भी कहा कि अगर शरद पवार 2014 में NDA में आ गए होते तो वह राष्ट्रपति बन चुके होते। ANI से बातचीत में आठवले ने कहा, "... शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं। हमने उन्हें कई बार NDA में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। अगर वह 2014 में शामिल हो जाते, तो शायद वह भारत के राष्ट्रपति भी बन सकते थे।"
शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात पर भी केंद्रीय मंत्री ने अपनी राय रखी और संजय राउत की "गद्दार" वाली टिप्पणी पर उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि एकनाथ शिंदे को गद्दार कहना सही है। मेरी नजर में, संजय राउत और उद्धव ठाकरे ने जनादेश के साथ धोखा किया। 2019 में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और NCP के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। उस फ़ैसले का नतीजा सामने आया है।" उन्होंने कहा कि गद्दार उद्धव ठाकरे हैं, एकनाथ शिंदे नहीं।
एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद से तनातनी
बता दें कि पिछले दिनों विधानसभा में एक उच्चस्तरीय बैठक में भाग लेने पहुंचे शरद पवार उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दफ्तर में भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने शिंदे से औपचारिक मुलाकात की थी। इस मुद्दे पर महाविकास अघाड़ी (MVA) के दोनों घटक दल NCP (शरद गुट) और शिवसेना (उद्धव गुट) के बीच सियासी तकरार और तनातनी जारी है। दोनों विपक्षी सहयोगियों ने इस UBTघटनाक्रम को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा है। शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने कहा कि शिंदे के कार्यालय में पवार की बैठक से उनकी पार्टी आहत है। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें पवार जैसे वरिष्ठ नेता की विश्वसनीयता कम करती हैं, और यह बैठक ''ग़द्दारों को महिमामंडित करने'' जैसी है।
राउत पर NCP का पलटवार
राउत के इस बयान पर NCP के नेताओं ने कड़े शब्दों में पलटवार करते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और उन्हें याद दिलाया कि पवार की उनके और शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ हुई मुलाकातों को पहले 'राजनीतिक सूझबूझ' के तौर पर सराहा गया था, तो अब ऐसी ओछी टिप्पणी क्यों की जा रही है? यह उल्लेख करते हुए कि राजनीति भावनाओं से नहीं, बल्कि गणित से चलती है, शरद पवार गुट वाली एनसीपी ने यह भी कहा कि अगर पवार और शिंदे के बीच हुई एक ही मुलाकात से विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाडी डगमगा सकता है, तो इससे पता चलता है कि उसकी नींव कमजोर है।
NCP ने कहा शिष्टाचार भेंट
बता दें कि शरद पवार ने बुधवार को मुंबई में विधान भवन परिसर में शिंदे के कार्यालय में अपनी पार्टी के विधायकों से मुलाक़ात की। पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर राज्य सरकार की ओर से बनाई गई उच्चाधिकार प्राप्त समिति के सदस्य के तौर पर एक बैठक में शामिल होने के लिए राज्य विधानसभा परिसर में थे। बैठक के बाद, पवार ने शिंदे से उनके कक्ष में ''शिष्टाचार भेंट'' की। इसके बाद गुरुवार को राउत ने कहा, ''शरद पवार एक वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं। जब कोई वरिष्ठ नेता उस गद्दार के घर जाकर ऐसी बैठकें करता है जिसने हमारी सरकार गिराई, तो उसकी विश्वसनीयता कम हो जाती है।'' उन्होंने कहा कि पवार का शिंदे के कार्यालय जाना गद्दारों को महिमामंडित करने जैसा है। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि पवार द्वारा शिंदे के कार्यालय में पार्टी की बैठक किया जाना दुखद है।
उन्होंने शिंदे पर महाराष्ट्र में ''भ्रष्टाचार रूपी दीमक के फैलने'' का कारण होने का आरोप लगाया। राउत ने कहा, ''क्या पूरी विधानसभा उपलब्ध नहीं थी (पवार को शिंदे के कैबिन में बैठक करनी पड़ी)? वाईबी चव्हाण प्रतिष्ठान राष्ट्रवादी भवन भी पास में था।'' उन्होंने कहा, ''यह पार्टी के एक वफ़ादार कार्यकर्ता की राय है। हम इतने सहनशील नहीं हैं कि गद्दारों के दफ़्तरों में बैठकें करने दें। हमारा दिल इतना बड़ा नहीं है और हम ऐसा करेंगे भी नहीं।'' राउत ने कहा कि पवार अपनी इच्छा से जो चाहें, वह करने के लिए स्वतंत्र हैं।
NCP की विश्वसनीयता कम हुई
उन्होंने कहा, ''इससे राकांपा (शप) की विश्वसनीयता कम होती है। शरद पवार के साथ (दिवंगत) अजित पवार की बेईमानी को देखते हुए, हमने अपनी पार्टी की बैठकें उनके दफ़्तर में नहीं कीं। हमने (राकांपा नेताओं के दफ़्तर में पार्टी की बैठक नहीं करने) के नियम का पालन किया।'' राउत ने कहा कि महा विकास अघाडी (एमवीए) के दलों को भी उस नियम का पालन करना चाहिए। राकांपा (शप) के प्रवक्ता अमोल मातेले ने राउत की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिवसेना (उबाठा) नेता को राजनीति से जुड़ी चीजों को समझना चाहिए। उन्होंने राउत से जानना चाहा कि वह पवार-शिंदे की मुलाकात से क्यों नाराज़ हैं।बैठक का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि शिंदे संवैधानिक पद पर हैं और पवार से उम्मीद की जाती है कि वह एक वरिष्ठ राजनेता के तौर पर, महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों - जैसे सीमा विवाद, सूखा, आरक्षण एवं विकास पर चर्चा करें। (एजेंसी इनपुट्स के साथ)


