ममता को लगा सबसे बड़ा झटका! कल हुए बागी, आज शुभेंदु के साथ मंच पर दिखे सांसद देव

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल! 20 टीएमसी सांसदों की बगावत के अगले ही दिन घाटाल सांसद और सुपरस्टार देव कोलाघाट में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में पहुंचे। देरी से आने के बावजूद देव को मुख्य मंच पर जगह मिली।

ममता को लगा सबसे बड़ा झटका! कल हुए बागी, आज शुभेंदु के साथ मंच पर दिखे सांसद देव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हुई अब तक की सबसे बड़ी बगावत के बाद अब घाटाल से सांसद और मशहूर अभिनेता देव (दीपक अधिकारी) मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की एक अहम बैठक में नजर आए हैं। टीएमसी के बागी सांसदों के गुट में शामिल होने के एक दिन बाद ही देव का कोलाघाट में शुभेंदु के साथ मुख्य मंच साझा करना बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय का इशारा कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 'बागी' माने जा रहे सांसद दीपक अधिकारी (देव) के अलावा, जून मालिया ने भी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में भाग लिया।

20 TMC सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को लिखी है चिट्ठी

सोमवार को ही टीएमसी के 29 में से 20 सांसदों ने एक साथ आकर एनडीए (NDA) में शामिल होने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले इन बागी टीएमसी सांसदों की सूची में घाटाल के सांसद देव का नाम भी शामिल था। इस लिस्ट में रचना बनर्जी, शताब्दी रॉय और जून मालिया जैसी वे हस्तियां भी शामिल हैं, जिन्हें एक समय 'दीदी' (ममता बनर्जी) के सबसे करीबियों में गिना जाता था। इस घटनाक्रम से साफ हो गया है कि विधायक दल के बाद अब ममता बनर्जी के हाथों से संसदीय दल भी निकल गया है।

देरी से पहुंचे देव, फिर भी मुख्य मंच पर मिली जगह

मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिमी मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों को लेकर कोलाघाट के 'बलाका मंच' पर एक प्रशासनिक बैठक की। बीते दिन भूपेंद्र यादव के घर हुई बैठक में देव सीधे तौर पर उपस्थित नहीं थे, लेकिन मंगलवार को वह इस कोलाघाट की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए।

दोपहर 12 बजकर 3 मिनट पर देव बैठक में पहुंचे। मुख्यमंत्री के बाद सबसे आखिर में पहुंचने के बावजूद उन्हें सीधा मुख्य मंच पर जगह दी गई। इस बैठक में पश्चिमी मेदिनीपुर के दो टीएमसी सांसद और दो टीएमसी विधायक भी शामिल हुए।

मुख्य मंच पर मौजूद रहे ये चार सांसद

कोलाघाट की इस अहम बैठक के मुख्य मंच पर कुल चार सांसद बैठे नजर आए, जिनमें सौमेंदु अधिकारी, देव, अभिजीत गंगोपाध्याय और जून मालिया शामिल थे। इनके अलावा शिउली साहा भी यहां उपस्थित थीं। बैठक में हिस्सा लेने के लिए झाड़ग्राम के जिलाधिकारी समेत अन्य सरकारी अधिकारी डीएम कार्यालय से बस के जरिए पहुंचे थे।

राजनीति छोड़ने का किया था ऐलान, फिर बदला फैसला

गौरतलब है कि देव ने ममता बनर्जी का हाथ थामकर ही रूपहले पर्दे से राजनीति की दुनिया में कदम रखा था और वे घाटाल से लगातार सांसद चुने गए। 2024 के चुनाव से पहले देव ने राजनीति छोड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन अभिषेक और ममता बनर्जी के साथ बैठकों के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया था। तब ममता ने खुद चुनावी जनसभा में ऐलान किया था कि राज्य सरकार देव के 'घाटाल मास्टर प्लान' को लागू करेगी।

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भी देव ने टीएमसी के लिए खूब पसीना बहाया था और तेज धूप के कारण वे बीमार भी पड़ गए थे। हालांकि, चुनाव परिणाम सामने आने के बाद उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सभी का ध्यान खींचा था, जिसमें उन्होंने बंगाल में भारी जीत के लिए बीजेपी को बधाई दी थी।

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Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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