भारत के पास सुपर डैम बना रहा था चीन, खतरा मंडराया; ब्रह्मपुत्र नदी के पास क्या मिला

भाषा
Follow us on Google News
share

चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) पर 167.8 अरब डॉलर की विशाल जलविद्युत परियोजना बना रहा है। हिमालय की गहरी घाटी में बन रहा यह बांध हर साल 300 अरब यूनिट से अधिक बिजली पैदा करेगा और करोड़ों लोगों की बिजली जरूरतें पूरी करने का दावा करता है।

China dam brahmputra river

चीनी भूवैज्ञानिकों के एक अध्ययन में पता चला है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना के नीचे एक सक्रिय फॉल्ट लाइन (भूगर्भीय दरार) मौजूद है, जो इसकी संरचनात्मक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। इस अध्ययन के बाद बीजिंग के इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं कि यह परियोजना क्षेत्र में आपदाओं को रोकने में मदद करेगी। यह परियोजना भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के काफी करीब है।

हो सकता है बड़ा असर

हांगकांग स्थित 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने गुरुवार को बताया कि वैज्ञानिकों ने कहा है कि पूर्वी हिमालय क्षेत्र में पृथ्वी की ठोस परत में मौजूद एक दरार इस विशाल जलविद्युत परियोजना के ढांचे की मजबूती पर बड़ा असर डाल सकती है।

पिछले महीने चीनी भाषा की पत्रिका 'सेडिमेंटरी जियोलॉजी और टेथियन जियोलॉजी' में प्रकाशित एक शोध पत्र में शोधकर्ताओं ने कहा कि हिमयुग से ही काफी सक्रिय रहे 'पैझेन फॉल्ट' बांधों, सड़कों, पुलों और सुरंगों समेत आसपास के ढांचों तथा जलाशय क्षेत्र की संरचनात्मक स्थिरता पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इस अध्ययन की निगरानी सरकारी संस्था 'चाइना जियोलॉजिकल सर्वे' ने की थी।

चट्टानें हुईं कमजोर

शोधकर्ताओं के अनुसार, लंबे समय से जारी फॉल्ट गतिविधि ने आसपास की चट्टानों को तोड़कर कमजोर कर दिया है, जिससे पास में जारी इंजीनियरिंग परियोजनाओं की नींव और संरचनात्मक स्थिरता नुकसान के प्रति अधिक संवेदनशील हो गई है। शोध पत्र में कहा गया, 'पैझेन क्षेत्र यारलुंग त्सांगपो के निचले हिस्से में बनने वाले जलविद्युत स्टेशन के जलाशय क्षेत्र के अंदर स्थित है।'

क्या है चीन का प्रोजेक्ट

चीन में ब्रह्मपुत्र नदी को यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है। चीन ने पिछले साल जुलाई में तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर 167.8 अरब अमेरिकी डॉलर की बांध परियोजना की आधिकारिक रूप से शुरुआत की थी।

इससे हर साल 300 अरब किलोवाट-घंटा से अधिक बिजली पैदा होने की उम्मीद है। यह परियोजना 30 करोड़ से अधिक लोगों की सालाना बिजली जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बताई जा रही है। यह बांध हिमालय की एक विशाल घाटी में बनाया जा रहा है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने से पहले एक तेज 'यू-टर्न' लेती है और फिर आगे बांग्लादेश की ओर बहती है।

क्यों संवेदनशील है जगह

चीन ने इस परियोजना को भारी इंजीनियरिंग चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ाया है, क्योंकि यह स्थान एक ऐसे 'टेक्टोनिक प्लेट' क्षेत्र पर स्थित है जहां अक्सर भूकंप आते हैं। तिब्बती पठार इसके नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण समय-समय पर आने वाले भूकंपों के प्रति संवेदनशील है।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।