संसद की सुरक्षा में चूक संयोग नहीं हो सकती, सांसदों के बीच गैस छोड़ने वालों से बोला दिल्ली हाईकोर्ट

Jan 16, 2026 08:52 am ISTNisarg Dixit भाषा
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पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत के समक्ष आरोप पर अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई फरवरी के लिए तय की और पक्षों को उच्चतम न्यायालय के उस फैसले को देखने के लिए कहा, जो गुलफिशा फातिमा के मामले में दिया गया था।

संसद की सुरक्षा में चूक संयोग नहीं हो सकती, सांसदों के बीच गैस छोड़ने वालों से बोला दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि 13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में हुई चूक महज एक संयोग नहीं हो सकती। यह घटना, 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी पर हुई थी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति सुधा जैन की पीठ ने सुरक्षा चूक मामले में तीन आरोपियों - मनोरंजन डी, सागर शर्मा और ललित झा - की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

आरोपियों के वकील ने यह दलील दी कि दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध नहीं है क्योंकि इस मामले में आरोपी केवल बेरोजगारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन इसपर पीठ ने कहा, 'यह संयोग नहीं हो सकता... 13 दिसंबर संयोग नहीं हो सकता।' आरोपियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि भले ही विरोध का यह तरीका सही न रहा हो, लेकिन उन्हें अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जाना चाहिए।

वकील ने कहा, 'उनमें गुस्सा था, लेकिन मैं पूरी तरह सहमत हूं कि विरोध का यह तरीका सही नहीं था। अगर हम इतिहास देखें, तो अंग्रेज भी लोगों को अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखते थे।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं और आरोपी शिक्षित युवक हैं जिनका किसी आपराधिक मामले में पहले कोई संलिप्तता नहीं है।

पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत के समक्ष आरोप पर अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई फरवरी के लिए तय की और पक्षों को उच्चतम न्यायालय के उस फैसले को देखने के लिए कहा, जो गुलफिशा फातिमा के मामले में दिया गया था।

फातिमा को हाल ही में, 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में यूएपीए (गैर कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम) के तहत जमानत दी गई थी। तीनों आरोपियों ने दिसंबर 2024 में निचली अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। आरोपी नीलम आजाद और महेश कुमावत को जुलाई 2025 में उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दे दी गई थी।

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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