शपथ के दो दिनों के अंदर दूसरे विवाद में घिरे CM विजय, गरीबी वाले दावे पर बचपन के साथी ने ही घेरा; क्या कहा?

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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जोसेफ ने लिखा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले भाषण में, विजय ने कहा कि वे गरीबी में पले-बढ़े हैं, क्या उन्हें यह भी पता है कि भूख क्या होती है। यह सरासर बकवास है, क्योंकि वे लोयोला स्कूल में तीसरी क्लास में मेरे क्लासमेट थे।

शपथ के दो दिनों के अंदर दूसरे विवाद में घिरे CM विजय, गरीबी वाले दावे पर बचपन के साथी ने ही घेरा; क्या कहा?

तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री और अभिनेता से नेता बने सुपरस्टार विजय अपने शपथ ग्रहण के दूसरे दिन ही दूसरे विवाद में घिर गए हैं। शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले भाषण में सीएम विजय ने खुद को “गरीबी और भूख देखने वाला आम आदमी” बताया था लेकिन उनके इस भावनात्मक बयान पर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उनके बचपन के स्कूल के सहपाठी और प्रसिद्ध लेखक-पटकथा लेखक मनु जोसेफ ने इन दावों को 'बकवास' करार दिया है और मुख्यमंत्री की आलोचना की है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में विजय ने कहा था कि उनका जन्म एक साधारण सहायक फिल्म निर्देशक के घर हुआ था और वह गरीबी तथा भूख को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने जनता से कहा, "मैं आपके जैसा ही हूँ, मैं आप में से ही एक हूँ... मेरा कोई शाही वंश नहीं है।" उनके इस दावे पर उनके ही सहपाठी मनु जोसेफ ने पलटवार किया है। मनु जोसेफ और विजय दोनों ही चेन्नई के लोयोला स्कूल में तीसरी कक्षा में सहपाठी थे। मनु जोसेफ ने सोशल मीडिया पर इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विजय के पिता, एस.ए. चंद्रशेखर, एक फिल्म निर्माता थे जिन्होंने अपने बेटे को फिल्मों में करियर के लिए तैयार किया था।

जोसेफ ने क्या लिखा?

जोसेफ ने एक्स पर लिखा, "तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले भाषण में, विजय ने कहा कि वे गरीबी में पले-बढ़े हैं, क्या उन्हें यह भी पता है कि भूख क्या होती है। यह सरासर बकवास है, क्योंकि वे लोयोला स्कूल में तीसरी क्लास में मेरे क्लासमेट थे। उनके पिता एक फ़िल्ममेकर थे, जिन्होंने अपने बेटे के लिए फिल्मों में करियर बनाया था।" जोसेफ़ ने आगे लिखा, “हो सकता है कि ज़्यादातर फ़िल्ममेकर्स की तरह उनके पिता को भी कभी-कभी पैसों की तंगी का सामना करना पड़ा हो, लेकिन यह तमिलनाडु की गरीबी जैसा नहीं है। बहुत से अमीर लड़के 'पैसे न होना' और 'गरीबी' में फ़र्क नहीं कर पाते। ये दोनों बहुत अलग चीज़ें हैं।”

जोसेफ़ ने लिखा और आगे कहा, "हमारे जमाने की सबसे बड़ी बकवास 'गरीबी से अमीरी तक' की कहानियाँ हैं। 1974 में विजय के जन्म तक चंद्रशेखर ज़्यादातर एक असिस्टेंट डायरेक्टर थे, और 1978 में जाकर वे डायरेक्टर बने।" विजय का फिल्मी और राजनीतिक सफर स्रोतों के अनुसार, विजय ने 1984 में अपने पिता की फिल्म 'वेत्री' से एक बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी और 1992 में फिल्म 'नालया थीरपू' से मुख्य अभिनेता बने। उनकी पार्टी, तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK), ने 23 अप्रैल के चुनावों में जीत हासिल की और बाहरी समर्थन के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर सरकार बनाई है।

बता दें कि रविवार 10 मई को शपथ ग्रहण के बाद अपने भाषण में विजय ने यह भी कसम खाई थी कि वह जनता के पैसे का एक पैसा भी नहीं छुएंगे और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। विजय ने कहा कि अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान, उन्हें और उनके समर्थकों को हर कदम पर कई मुश्किलों और अपमान का सामना करना पड़ा। मुश्किलों और अपमान के समय उनके साथ खड़े रहने के लिए लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा कि वह भी एक आम इंसान हैं जो एक सामान्य जीवन जीते हैं, कोई फरिश्ता नहीं हैं। इससे पहले विजय के शपथ समारोह में तब विवाद छिड़ गया था, जब सरकारी समारोहों के प्रोटोकॉल के हिसाब से तमिलनाडु का राज्य गीत पहले नहीं बजाया गया। उनकी सरकार में शामिल CPI के नेता ने ही इस पर आपत्ति जताई है।

कौन हैं मनु जोसेफ?

विजय की आलोचना करने वाले मनु जोसेफ स्वयं एक फिल्मी परिवार से हैं और 'सीरियस मेन' जैसी बेस्टसेलर किताबों के लेखक हैं। उन्होंने हाल ही में गरीबी पर एक किताब 'व्हाई द पुअर डोंट किल अस' भी लिखी है, जो काफी चर्चा में रही थी। उनके पिता जोसेफ़ मडप्पल्ली ने 1987 में मलयालम फ़िल्म ‘थोरानम’ का निर्देशन किया था। अब दिल्ली में रहने वाले जोसेफ़ ने 2010 में अपनी बेस्टसेलर किताब ‘सीरियस मेन’ के साथ लेखक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। इसी किताब पर आधारित 2020 में सुधीर मिश्रा ने नेटफ़्लिक्स इंडिया के लिए एक फ़िल्म बनाई, जिसमें नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। वह नेटफ़्लिक्स इंडिया के 2021 के ड्रामा-कॉमेडी शो ‘डिकपल्ड’ के निर्माता और लेखक भी हैं, जिसमें आर. माधवन ने अभिनय किया है। पिछले साल जोसेफ़ एक और किताब के साथ सामने आए, जिसने काफी विवाद भी खड़ा किया था, ‘Why The Poor Don’t Kill Us’ (गरीब हमें क्यों नहीं मारते)।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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