NSA के तहत कितने दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है, SC में होगी सोनम वांगचुक मामले की सुनवाई
रासुका के तहत किसी व्यक्ति को 12 महीने तक ही हिरासत में रखा जा सकात है। सोनम वांगचुक को 6 महीने पहले हिरासत में लिया गया था। सरकार चाहे तो अवधि से पहले भी व्यक्ति को रिहा किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने शनिवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। गृह मंत्रालय ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह निर्णय लद्दाख में शांति, स्थिरता और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
गौरतलब है कि वांगचुक को पिछले साल 24 सितंबर को लेह में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न होने के बाद 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल भेजा गया था। श्री वांगचुक उक्त अधिनियम के अंतर्गत हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय व्यतीत कर चुके हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून अधिनियम की धारा के तहत किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने की अधिकतम अवधि 12 महीने हो सकती है। सरकार यदि चाहे, तो इस अवधि के समाप्त होने से पहले किसी भी समय व्यक्ति को रिहा कर सकती है।
गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, सरकार लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं को दूर करने के लिए विभिन्न हितधारकों और सामुदायिक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को 'उच्च अधिकार प्राप्त समिति' और अन्य उचित मंचों के माध्यम से रचनात्मक चर्चा द्वारा हल किया जाएगा। सरकार ने लद्दाख की सुरक्षा और विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
इससे पहले वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म '' पर कहलवाया था कि हिरासत में रहने के बाद भी उन्होंने सक्रियता से दूरी नहीं बनाई है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखवाया था कि लद्दाख की सुरक्षा, गरिमा और भविष्य के लिए उनका संघर्ष एकता और ईमानदारी के साथ जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने उनकी हिरासत को 'अवैध और मनमाना' बताते हुए उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। इस मामले की सुनवाई अभी चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंग्मो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 मार्च को अंतिम सुनवाई करेगा। जज ने कहा, ''हम यह बिल्कुल स्पष्ट कर रहे हैं कि चाहे कुछ भी हो, हम अंतिम सुनवाई के बाद अगले मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रखेंगे। हम किसी भी नये बिंदु पर बहस की अनुमति नहीं देंगे और सॉलिसिटर जनरल, केवल सिब्बल द्वारा अपने जवाबी तर्क में उठाए गए नये बिंदुओं पर बहस कर सकते हैं।' इससे पहले मेहता ने पीठ द्वारा वांगचुक के भाषणों के अनुवाद को लेकर उठाए गए मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने की कोशिश की थी।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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