Hindi NewsIndia NewsSC to hear Justice Yashwant Varma plea against setting up panel in Cash discovery row
कैश कांड के आरोपी जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुनवाई को तैयार हुआ SC, जांच को दी है चुनौती

कैश कांड के आरोपी जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुनवाई को तैयार हुआ SC, जांच को दी है चुनौती

संक्षेप:

उच्चतम न्यायालय न्यायमूर्ति वर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें न्यायाधीश जांच अधिनियम द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत लोकसभा द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की वैधता को चुनौती दी गई थी।

Dec 16, 2025 02:00 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी, जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित जांच समिति की वैधता को चुनौती दी है। यह समिति जज पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने लोकसभा स्पीकर के कार्यालय तथा लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

जांच समिति का गठन और पूरा मामला

यह जांच समिति लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3(2) के तहत गठित की गई थी। समिति में शामिल सदस्य हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार (अध्यक्ष),
  • मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव,

-कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य।

यह समिति 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने की घटना के बाद मिले जले हुए नकदी के बंडलों से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। आग बुझाने पहुंची दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस कर्मियों ने जलें हुए नोटों के ढेर पाए थे, जिसके बाद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।

इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया और उनकी न्यायिक जिम्मेदारियां छीन ली गईं। पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना द्वारा गठित एक इन-हाउस जांच समिति ने भी आरोपों में दम पाया और हटाने की सिफारिश की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज नहीं किया। इसके बाद 146 सांसदों (सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों से) द्वारा हस्ताक्षरित हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में स्वीकार किया गया, जिसके आधार पर जांच समिति बनी। हाल ही में, दिसंबर 2025 में समिति ने जस्टिस वर्मा को आरोपों का मेमो सौंपा और जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया।

जस्टिस वर्मा की याचिका में मुख्य दलीलें

जस्टिस वर्मा की याचिका में लोकसभा स्पीकर के 12 अगस्त 2025 के उस निर्णय को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है, जिसमें केवल लोकसभा स्पीकर ने एकतरफा समिति गठित की। याचिका में कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 का उल्लंघन है तथा जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत है।

याचिका के अनुसार, जब दोनों सदनों में जज के हटाने का प्रस्ताव पेश किया जाता है या स्वीकार किया जाता है, तो जांच समिति का गठन लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन द्वारा संयुक्त रूप से किया जाना चाहिए, न कि केवल लोकसभा स्पीकर द्वारा एकतरफा। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रस्ताव दोनों सदनों में पेश होने की स्थिति में समिति का गठन संयुक्त रूप से अनिवार्य है।

कानूनी प्रावधान

जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के अनुसार, जज के हटाने (इंपिचमेंट) का प्रस्ताव किसी एक सदन में स्वीकार होने पर स्पीकर या चेयरमैन (जैसा लागू हो) जांच समिति गठित करते हैं। यदि दोनों सदनों में एक ही दिन प्रस्ताव पेश होता है और दोनों में स्वीकार होता है, तो समिति संयुक्त रूप से गठित की जाती है। वर्तमान मामले में प्रस्ताव केवल लोकसभा में स्वीकार हुआ, इसलिए स्पीकर द्वारा एकतरफा गठन कानूनी रूप से सही प्रतीत होता है, लेकिन याचिका इसी बिंदु पर चुनौती दे रही है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।