Hindi NewsIndia NewsSC gave big relief to TMC stays Calcutta HC verdict disqualifying Mukul Roy as MLA for defecting to Trinamool Congress
ED केस में झटके के बाद TMC को SC से राहत, मुकुल रॉय की विधायकी रद्द करने पर HC के फैसले पर रोक

ED केस में झटके के बाद TMC को SC से राहत, मुकुल रॉय की विधायकी रद्द करने पर HC के फैसले पर रोक

संक्षेप:

रॉय मई 2021 में कृष्णानगर उत्तर सीट से BJP टिकट पर चुने गए थे लेकिन उसी वर्ष जून में विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में वह सत्तारूढ़ TMC में शामिल हो गए थे।

Jan 16, 2026 03:06 pm ISTPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 जनवरी) को कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा के विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। I-PAC के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC को झटका मिलने के बाद टॉप कोर्ट से यह बड़ी राहत है।

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देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने हाई कोर्ट के 13 नवंबर 2025 के आदेश पर रोक लगा दी है। दलबदल विरोधी कानून का सहारा लेते हुए उच्च न्यायालय ने पहली बार दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी निर्वाचित सदस्य को अयोग्य घोषित करने के लिए अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया था।

BJP के टिकट पर जीते, TMC में चले गए

रॉय मई 2021 में कृष्णानगर उत्तर सीट से भाजपा के टिकट पर विधानसभा के लिए चुने गए थे लेकिन उसी वर्ष जून में विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उनकी सदस्यता को विधानसभा अध्यक्ष के पास चुनौती दी थी लेकिन विधानसभा अध्यक्ष बिमान बोस ने उनकी अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि मुकुल रॉय भाजपा के ही विधायक हैं।

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स्पीकर के फैसले को HC ने दिया था विकृत करार

बाद में शुभेंदु अधिकारी और भाजपा विधायक अंबिका रॉय ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष बिमान बोस के फैसले को ‘विकृत’ करार दिया था, जिन्होंने दल-बदल विरोधी कानून के तहत रॉय को विधायक के रूप में अयोग्य ठहराने की याचिका पर अपने फैसले में कहा था कि वह भाजपा के ही विधायक हैं। HC ने लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के रूप में रॉय के नामांकन को भी रद्द कर दिया था क्योंकि सदन की उनकी सदस्यता 11 जून, 2021 से समाप्त मानी गई थी।

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पहली बार HC ने संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर MLA को दिया अयोग्य करार

शुभेंदु अधिकारी के वकील बिलवादल बनर्जी ने तब कहा था, ‘‘देश में यह पहली बार है कि किसी उच्च न्यायालय ने दल-बदल विरोधी कानून (जो 1985 में संविधान के 52वें संशोधन द्वारा लागू किया गया था) के तहत किसी विधायक को अयोग्य ठहराने के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया है। अदालत को यह फैसला सुनाने में भले ही कुछ समय लगा हो। लेकिन, यह सत्य और धर्म की विजय है।’’ अधिकारी ने विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी के उस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें रॉय को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने के अनुरोध संबंधी उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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