सवर्णों के मुकाबले तीन गुना पिछड़ी हैं SC जातियां, किस कास्ट के लोग सबसे अमीर; सर्वे ने बताया
तेलंगाना में 'डक्काल' जाति सबसे ज्यादा पिछड़ी पाई गई है, जबकि उसका इंडेक्स में स्कोर 116 पाया गया है। वहीं राज्य की सबसे अग्रणी जाति 'कापू' है, जिसका स्कोर 12 ही रहा है। कापू जाति तेलंगाना में सवर्ण समुदाय में आने वाला वर्ग है। इस बिरादरी के लोगों पर बड़ी संख्या में खेती की जमीनें हैं।

तेलंगाना में कराए गए सामाजिक-आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट में पाया गया है कि सामान्य वर्ग की जातियों के मुकाबले अनुसूचित वर्ग तीन गुना पिछड़ा है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सवर्ण जातियों के मुकाबले पिछड़े वर्ग की जातियां 2.7 गुना पिछड़ी हैं। राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पी. प्रभाकर ने कहा कि राज्य में एक बैकवर्ड इंडेक्स स्कोर तैयार किया गया है। इसके अनुसार यदि किसी समाज का इंडेक्स में स्कोर ज्यादा है तो इसका अर्थ है कि वह ज्यादा पिछड़ा हुआ है। मंत्री ने कहा कि राज्य में कुल 135 ऐसी जातियां हैं, जो काफी पिछड़ी हैं। इन जातियों की कुल आबादी राज्य में 67 फीसदी है।
उन्होंने कहा कि राज्य में 'डक्काल' जाति सबसे ज्यादा पिछड़ी पाई गई है, जबकि उसका इंडेक्स में स्कोर 116 पाया गया है। वहीं राज्य की सबसे अग्रणी जाति 'कापू' है, जिसका स्कोर 12 ही रहा है। कापू जाति तेलंगाना में सवर्ण समुदाय में आने वाला वर्ग है। इस बिरादरी के लोगों पर बड़ी संख्या में खेती की जमीनें हैं और वे लंबे समय से वहां के सशक्त समुदाय के हैं। सरकार का कहना है कि राज्य अलग-अलग जातियों के बीच जिस तरह की गैर-बराबरी है, वह चिंता की बात है। सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की पिछड़ी जातियों के 78 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो पिछड़े हैं।
इनकी सालाना कमाई 1 लाख रुपये सालाना ही है या उससे भी कम है। वहीं दूसरे समुदायों के 13 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनकी कमाई 5 लाख से 50 लाख सालाना तक है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के 2.1 फीसदी लोग ही ऐसे हैं, जिनकी कमाई 5 लाख सालाना से अधिक है। इस सर्वे में बताया गया है कि 21 फीसदी आबादी ऐसी है, जिनके पास पानी की सप्लाई नहीं पहुंची है। इसके अलावा 13 फीसदी लोगों के पास टॉयलेट की सुविधा नहीं है। करीब 6 फीसदी लोग तो अब भी ऐसे हैं, जिनके पास बिजली का कनेक्शन तक नहीं है।
तेलंगाना की कुल 142 जातियों में से 135 पिछड़ी
राज्य में जातियों के आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन को मापने के लिए 42 संकेतक तय किए गए हैं। इस सर्वे में कुल 242 जातियों का अध्ययन किया गया है। कुल 135 पिछड़ी जातियों में से 69 तो पिछड़ा वर्ग की हैं। इसके बाद 41 जातियां अनुसूचित जातिवर्ग की हैं। वहीं 25 जनजातियां हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन जातियों में शिक्षा और रोजगार के मामले में पिछड़ापन है। उनकी अस्पतालों तक में पहुंच नहीं है। उनके घर भी काफी छोटे हैं और जमीनें भी कम हैं। यहां तक कि वे साफ-सुथरे टॉयलेट के लिए भी मोहताज हैं और उनके घरों में स्वच्छ पेयजल की भी कमी पाई जाती है।
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