यह गलत मिसाल, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द कर दी छह साल से फरार आरोपी की अग्रिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में छह साल से अधिक समय तक फरार हत्या के एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने के हाई कोर्ट के आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने आरोपी को चार सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में छह साल से अधिक समय तक फरार हत्या के एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने के हाई कोर्ट के आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने आरोपी को चार सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि वह वहां नियमित जमानत का अनुरोध करने लिए स्वतंत्र होगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहाकि किसी फरार आरोपी को सह-आरोपियों के बरी होने के आधार पर राहत देना खराब मिसाल बनेगा। यह कानून से बचने को प्रोत्साहित करता है।
फैसले में क्या लिखा
जस्टिस बिश्नोई ने फैसले में लिखा है, ‘सामान्य नियम के अनुसार फरार आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं मिलता। हालांकि, कुछ असाधारण मामलों में, जब प्राथमिकी, केस डायरी और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच पर अदालत प्रथमदृष्टया यह राय बनाती है कि फरार आरोपी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता, तब फरार आरोपी के पक्ष में अग्रिम जमानत देने के अधिकार का प्रयोग किया जा सकता है।’ मामले के तथ्यों का हवाला देते हुए, फैसले में हाई कोर्ट के आदेश को पूरी तरह से गलत और त्रुटिपूर्ण बताया गया। अदालत ने कहाकि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के अनुसार आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई असाधारण कारण नहीं पाया गया।
बेंच ने कहा कि आरोपी एक भीड़ का सदस्य था और न केवल जांच से भाग गया बल्कि उसने घायल पीड़ित शैलेन्द्र उर्फ पिंटू, जो एक प्रत्यक्षदर्शी भी था, को जान से मारने की धमकी दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि संबंधित तथ्यों पर विचार करते हुए हम 19 जनवरी, 2024 के लागू आदेश को रद्द करते हैं और आरोपी को आज से चार सप्ताह की अवधि के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश देते हैं।
ऐसा है पूरा मामला
यह मामला मध्यप्रदेश में 2017 की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें दो राजनीतिक समूहों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी उस भीड़ का हिस्सा था, जिसने शिकायतकर्ता की पार्टी पर आग्नेयास्त्रों, लाठियों और तलवारों से हमला किया था। हिंसा में बबलू चौधरी नामक व्यक्ति की मौत हो गई और प्रत्यक्षदर्शी शैलेन्द्र उर्फ पिंटू समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कई सह-आरोपियों पर मुकदमा चला और अंततः जून 2023 में उन्हें बरी कर दिया गया, प्रतिवादी नंबर दो (सह-आरोपी चंदन सिंह का बेटा) दो जून 2017 को हुई घटना के बाद से फरार था।
2023 में अन्य सह-आरोपियों के बरी होने के बाद, आरोपी ने तीसरी अग्रिम जमानत याचिका दायर की। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 19 जनवरी, 2024 को उसे राहत प्रदान की। अदालत ने यह फैसला मुख्य रूप से समानता के आधार पर दिया। वजह, मुख्य मुकदमे में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था और शेष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं था।



