भारत में बैन पर विदेश में मची 'सतलुज' की धूम, लंदन के गुरुद्वारे में ओपन एयर स्क्रीनिंग
दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म सतलुज को भारत में बैन कर दिया गया है। इके बाद भी विदेश में इसकी स्क्रीनिंग हो रही है। लंदन के गुरुद्वारे में फिल्म की ओपन स्क्रीनिंग की गई।
भारत में 'सतलुज' फिल्म को भले ही बैन कर दिया गया हो लेकिन विदेश में इसका जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। विदेश में जहां भी पंजाब से जुड़े लोग रहते हैं, वे इस फिल्म को देख रहे हैं। बता दें कि दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म पंजाब में हजारों युवाओं के लापता होने और फिर उनके दफनाए जाने का खुलासा करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। 1995 में खालड़ा को भी पुलिस ने उठा लिया था और फिर उनकी लाश भी कभी नहीं मिली। सेंशल बोर्ड ने इस फिल्म में 120 कट लगाने को कहा था। इसी वजह से फिल्म थिएटर में नहीं रिलीज हुई। फिर इसे ओटीटी प्लैटफॉर्म जी-5 पर रिलीज किया गया। भारत में अब फिल्म को पूरी तरह बैन कर दिया गया है।
लंदन में ओपन एयर स्क्रीनिंग
लंदन के गुरुद्वारा श्री सिंह सभा साउथॉल में इस फिल्म की ओपन एयर स्क्रीनिंग की गई। सैकड़ों की संख्या में लोग फिल्म देखने इकट्ठे हुए। कई सिख संगठन पंजाब के गांवो में भी इसी तरह फिल्म का प्रदर्शन कर रहे हैं। गांव-गांव में बड़ी स्क्रीन लगाकर फिल्म दिखाई जा रही है। वहीं केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का कहना है कि फिल्म में गलत तथ्य पेश किए गए हैं। बर्मिंघम गुरुद्वारे में भी फिल्म की स्क्रीनिंग की गई।
दिल्ली और पंजाब के गुरुद्वारों में भी स्क्रीनिंग
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि गुरुद्वारे के बाहर सैकड़ों की संख्या में बच्चे, बड़े और बुजुर्ग फिल्म देख रहे हैं। बीते दिनों दिलजीत दोसांझ ने भी कहा था कि उन्हें खुशी है कि फिल्म लोगों के घरों तक पहुंच गई है। उन्होंने फिल्म को रिलीज करने की मांग करने वाली एक पीआईएल भी फाइल की है। पंजाब और दिल्ली के कई गुरुद्वारों में फिल्म की स्क्रीनिंग की गई है।
पूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी में 11 जुलाई को बेसमेंट में फिल्म दिखाई गई। रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का कहना है कि यह आपत्ति मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा या उनकी विरासत के खिलाफ नहीं थी, बल्कि फिल्म में चित्रित झूठी कहानियों और तथ्यात्मक अशुद्धियों के खिलाफ थी। रवनीत सिंह बिट्टू के फिल्म को लेकर दिए गए बयान के बाद पंजाब में ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह ने उनका वरोध किया और कहा कि रवनीत बिट्टू को अपनी हद में रहना चाहिए।
बिट्टू ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य के अतीत के बारे में भ्रामक बातें पेश करके पंजाब में विभाजन पैदा करने की बार-बार कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के रुख का उद्देश्य पंजाब की सामाजिक सद्भाव की रक्षा करना और हिंदुओं तथा सिखों के बीच लंबे समय से चले आ रहे बंधन को संरक्षित करना है। दोनों समुदायों की साझा सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "दो रंग गुरु दा - एक होला, एक होली।"
लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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