
कर्नाटक में सीएम पोस्ट पर नाटक? सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार की खींचतान में संतों का समर्थन किसे
कर्नाटक में सीएम पद के लिए चल रही रेस दिलचस्प होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच कुर्सी की खींचतान में संतों ने त्रिकोण बना दिया है। गुरुवार को यहां पर विभिन्न मठों के संतों के एक समूह ने बैठक की।
कर्नाटक में सीएम पद के लिए चल रही रेस दिलचस्प होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच कुर्सी की खींचतान में संतों ने त्रिकोण बना दिया है। गुरुवार को यहां पर विभिन्न मठों के संतों के एक समूह ने बैठक की और गृहमंत्री जी परमेश्वर को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की। संतों के समूह की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सत्ताधारी दल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व के मुद्दे को लेकर खींचतान जारी है। यहां आयोजित बैठक में लिंगायत, वोक्कालिगा, पिछड़े और दलित समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले संतों ने भाग लिया और आपसी एकजुटता का प्रदर्शन किया। संतों ने एकजुट होकर परमेश्वर को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की।
कुंचितिगारा महा संस्थान मठ, येलेरामपुरा के हनुमंतनाथ स्वामीजी ने यहां संवाददाताओं से कहाकि तुमकुरु जिले के प्रभारी मंत्री और गृह मंत्री जी. परमेश्वर को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। इस कदम से पार्टी को पिछड़े समुदाय के साथ न्याय करने का श्रेय भी मिलेगा। हनुमंतनाथ स्वामीजी ने कहाकि जाति या किसी अन्य संबद्धता से परे, सभी मठों के संत एक स्वर में चाहते हैं कि (यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो) ऐसी स्थिति में परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाया जाए...इससे जिले (तुमकुरु) के सर्वांगीण विकास में भी मदद मिलेगी, चाहे वह सिंचाई हो, मेट्रो हो, पेयजल हो या अन्य चीजें हों। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके परमेश्वर ने खुद पिछले महीने कहा था कि वह भी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं। कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में एक दलित मुख्यमंत्री की मांग उठती रही है, जिसमें परमेश्वर प्रमुख दावेदारों में से एक हैं। परमेश्वर दलित समुदाय से हैं।
इससे पहले कर्नाटक के बेलगावी में वरिष्ठ लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा बुधवार रात आयोजित एक रात्रिभोज में कांग्रेस के समान विचारधारा वाले विधायकों के शामिल होने से राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान और अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। इस जमावड़े में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे और विधान परिषद सदस्य यतींद्र सिद्धारमैया तथा विधायक के एन राजन्ना सहित तीस से अधिक विधायक शामिल हुए। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वास्थ्य कारणों से इस कार्यक्रम में खुद उपस्थित नहीं हो सके।
सतीश जारकीहोली ने इस बैठक को राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान एक सामान्य सामाजिक मेलजोल करार दिया है। लेकिन इसमें शामिल कई विधायकों ने संकेत दिया कि वहां राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले के एन राजन्ना ने पुष्टि की कि पार्टी की रणनीति और नेतृत्व से जुड़े मामले बातचीत का हिस्सा थे।





