राम मंदिर आंदोलन के दौरान गूंज उठी थी जिनकी आवाज, साध्वी ऋतंभर को मिला पद्म भूषण

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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  • साध्वी ऋतंभरा को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। साध्वी ऋतंभरा राम मंदिर आंदोलन के दौरान काफी सक्रिय थीं। उनकी वजह से हजारों महिलाएं भी आंदोलन में कूद पड़ी थीं।

राम मंदिर आंदोलन के दौरान गूंज उठी थी जिनकी आवाज, साध्वी ऋतंभर को मिला पद्म भूषण

राम मंदिर आंदोलन के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाली महिला और बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी रह चुकीं साध्वी ऋतंभरा को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। उन्हें सामाजिक कार्य के लिए देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार से नावाज गया है। बता दें कि साध्वी ऋतंभरा विश्व हिंदू परिषद की ऐसी कार्यकर्ता थीं जिनकी हुंकार को सुनकर पुरुष ही नहीं बड़ी संख्या में महिलाएं भी राम मंदिर आंदोलन में शामिल हो गईं और कारसेवा करने पहुंच गईं। उनका प्रभावी व्यक्तित्व और जोरदार भाषण आज भी चर्चा का विषय रहता है। राम मंदिर आंदोलन के समय उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा फायरब्रैंड महिलाएं थीं।

साध्वी ऋतंभरा ने राम मंदिर आंदोलन के वक्त हिंदुओं से भेदभाव भुलाकर एक साथ आने का आह्वान किया। साध्वी ऋतंभर का पहले नाम निशा किशोरी थी। वह पंजाब के मंडी दौराहा गांव की रहने वाली थीं। गरीब परिवार में उनका जन्म हुआ था। उन्होंने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि दो किरायेदार लड़कों से दोस्ती के चलते उन्हें उनकी मां ने थप्पड़ मार दिया था। इसके बाद उनका मन घर में नहीं लगा। गुस्से की वजह से वह घर से निकल गईं।

साध्वी ऋतंभरा हरिद्वार चली गईं। वह स्वामी परमानंद के आश्रम पहुंचीं। यहीं उन्हें अध्यात्म का ज्ञान मिला। वह स्वामी परमानंद की शिष्या बन गईं। उनके साथ उन्होंने देश में भ्रमण किया और बोलने की कला भी सीख गईं। इसके बाद वह विश्व हिंदू परिषद से जुड़ गईं। वह बोलने में माहिर थीं इसलिए जल्दी ही उन्हें प्रवक्ता बना दिया गया। राम मंदिर आंदोलन के समय हाल यह था कि साध्वी ऋतंभर के जोशीले भाषणों के कैसेट्स बेचे जाते थे। उनके भाषण को गली और नुक्कड़ों पर सुनाया जाता था। मंदिरों पर उनके भाषण बजाए जाने लगे।

1991 में उनकी उम्र 25 के आसपास ही रही होगी। उनके भाषणों पर रोक लगा दिया गया था और दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। 6 दिसंबर को जब बाबरी विध्वंस हुआ तो बीजेपी और बजरंग दल के दिग्गज नेताओं के साथ साध्वी ऋतंभरा भी मौजूद थीं। कारसेवकों ने जब विवादित ढांचे पर हमला किया तो कई नेता उन्हें रोकने लगे लेकिन साध्वी ऋतंभरा उनमें से नहीं थी। उन्हें बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी बनाया गया था। 202 में उन्हें सीबीआई अदालत ने बरी कर दिया था।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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