वामपंथियों को ले डूबा भगवान अयप्पा का क्रोध? सबरीमाला घोटाले ने लगाई लंका, कांग्रेस की बम-बम

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केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस नीत UDF को स्पष्ट बहुमत मिला है। जानें कैसे सबरीमाला मंदिर सोना घोटाले और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के कारण वामपंथी (LDF) सरकार को सत्ता गंवानी पड़ी। पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी।

वामपंथियों को ले डूबा भगवान अयप्पा का क्रोध? सबरीमाला घोटाले ने लगाई लंका, कांग्रेस की बम-बम

केरल की राजनीति में एक बार फिर इतिहास ने करवट ली है। सोमवार को जारी विधानसभा चुनाव की मतगणना के नतीजे साफ बता रहे हैं कि वामपंथी गठबंधन (LDF) की सत्ता से विदाई हो रही है और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) को प्रचंड बहुमत मिल रहा है। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 140 सीटों वाली विधानसभा में अकेले कांग्रेस 60 से ज्यादा सीटों जीत रही है।

लेकिन इस भारी जीत और वामपंथियों की हार के पीछे सिर्फ 'एंटी-इनकंबेंसी' यानी सत्ता विरोधी लहर नहीं है। केरल की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही चर्चा है- क्या वामपंथी सरकार को भगवान अयप्पा का क्रोध ले डूबा? क्या सबरीमाला मंदिर में हुए 'सोना घोटाले' ने LDF की राजनीतिक लंका लगा दी? आइए समझते हैं कि आखिर कैसे एक धार्मिक और प्रशासनिक घोटाले ने केरल की चुनावी हवा का रुख पूरी तरह से बदल दिया।

आस्था के केंद्र में भ्रष्टाचार की सेंध

सबरीमाला मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। इस विवाद की कहानी साल 1998-99 से शुरू होती है, जब उद्योगपति विजय माल्या ने भगवान अयप्पा के गर्भगृह और मूर्तियों पर परत चढ़ाने के लिए 30.3 किलोग्राम सोना और 10,900 किलोग्राम तांबा दान किया था।

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन सितंबर 2025 में केरल हाईकोर्ट में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि गर्भगृह के 'द्वारपालकों' और 'पीठम' की मूर्तियों से सोने की परतें 'मरम्मत' के नाम पर गायब कर दी गई हैं।

कैसे रची गई सोने की चोरी की साजिश?

जांच में जो बातें सामने आईं, उसने केरल के आम आदमी को झकझोर कर रख दिया।

दस्तावेजों में खेल: 2019 में जब मूर्तियों की मरम्मत का फैसला हुआ, तो मंदिर का प्रशासन संभालने वाले 'त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड' (TDB) के कागजातों में सोने की प्लेटों को चालाकी से 'तांबे की प्लेटें' लिख दिया गया।

सोने की हेराफेरी: इन प्लेटों को चेन्नई की एक फर्म में ले जाया गया। वहां 4.54 किलोग्राम शुद्ध सोना निकाल लिया गया और चोरी छिपाने के लिए वापस केवल 394 ग्राम सोने की ही पॉलिश (इलेक्ट्रोप्लेटिंग) की गई।

जांच की आंच और बड़े चेहरों की गिरफ्तारी

जैसे ही यह मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आया, एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन हुआ। जनवरी 2026 में इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो गई। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया और केरल से लेकर तमिलनाडु तक 21 ठिकानों पर छापेमारी की।

इस मामले में केवल आम कर्मचारी ही नहीं, बल्कि मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदरारू राजीवरु और मरम्मत का जिम्मा संभालने वाले मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि चुराए गए भारी भरकम सोने में से बमुश्किल 584 ग्राम ही बरामद हो सका है।

वामपंथियों (LDF) को क्यों भुगतना पड़ा खामियाजा?

अब सवाल उठता है कि मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार का खामियाजा LDF सरकार को क्यों भुगतना पड़ा?

सरकार की जवाबदेही: त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) सीधे तौर पर राज्य सरकार के नियंत्रण में आता है। बोर्ड में होने वाली हर नियुक्ति और बड़े फैसले पर सरकार की मुहर होती है। जनता के बीच यह संदेश गया कि सरकार की नाक के नीचे इतना बड़ा घोटाला चलता रहा और वे सोते रहे।

आस्था पर चोट: 2018 में सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर भी वामपंथी सरकार और श्रद्धालुओं के बीच भारी टकराव हुआ था। हिंदू मतदाता पहले से ही सरकार के रवैये से नाराज थे। सोने की चोरी ने 'आग में घी' का काम किया और इसे भगवान अयप्पा के अपमान के रूप में देखा गया।

चुनावी नतीजे और कांग्रेस की 'बम-बम'

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस (UDF) ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया। उन्होंने इसे सिर्फ एक आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार बताया। एग्जिट पोल ने जो अनुमान जताए थे, सोमवार की मतगणना ने उस पर मुहर लगा दी।

जहां LDF अपनी साख और सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं कांग्रेस के खेमे में जश्न का माहौल है। 140 में से 56 सीटों पर अकेले कांग्रेस की बढ़त इस बात का प्रमाण है कि केरल के मतदाताओं ने भ्रष्टाचार और धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया।

राजनीति में जब भ्रष्टाचार के साथ धार्मिक भावनाएं जुड़ जाती हैं, तो वह किसी भी मजबूत सरकार की जड़ें हिलाने का माद्दा रखती हैं। केरल का यह चुनाव साबित करता है कि सबरीमाला के सोने की चमक भले ही चुरा ली गई हो, लेकिन उस चोरी की आग ने वामपंथियों के सियासी किले को पूरी तरह से भस्म कर दिया है।

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Amit Kumar

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