सायोनी घोष वाले 20 बागी सांसदों के गुट में भी फूट? 17 थामेंगे BJP का हाथ; तीन ने क्यों छोड़ा साथ

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बसुनिया ने कहा कि  20 सांसदों में से अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले तीन सांसद औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियां इसके अनुकूल नहीं हैं।

Where is Saayoni Ghosh now
तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI के साथ विलय करने वाले सांसदों में सायोनी घोष भी शामिल थीं। (ANI Photo/Rahul Singh)

काबा-मदीना गाने वालीं पश्चिम बंगाल से लोकसभा सांसद सायोनी घोष समेत तृणमूल कांग्रेस (TMC) के जिन 20 सांसदों ने कुछ महीने पहले TMC में बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामा था, अब उस NCPI में भी फूट पड़ने की खबरें आ रही हैं। सायोनी घोष की ही तरह बगावत करने वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता और कूचबिहार से लोकसभा सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि कि NCPI के 20 में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने वाले हैं।

बसुनिया ने संवाददाताओं से कहा कि इन 17 सांसदों ने एक साथ भाजपा में शामिल होने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है और दावा किया कि सामूहिक रूप से दल बदलने पर वे दल-बदल रोधी कानून के दायरे में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, ''हम 17 सांसद एकसाथ भाजपा में जा रहे हैं। चूंकि 20 सदस्यों में से दो-तिहाई से अधिक सांसद दल बदल रहे हैं, इसलिए दलबदल रोधी कानून हम पर लागू नहीं होगा।''

'20 में 14 आए साथ तो दल-बदल नहीं होगा लागू'

बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC में बड़े पैमाने पर बगावत हो गई थी और 14 जून को तृणमूल के 20 असंतुष्ट सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की थी और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का ऐलान किया था। इन 20 बागी सांसदों में से कम से कम 14 सांसदों का दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करने के लिए साथ जाना जरूरी है, ताकि उन्हें अयोग्यता का सामना ना करना पड़े।

तीन मुस्लिम सांसदों की BJP को ना

बसुनिया ने कहा कि हालांकि, इन 20 सांसदों में से अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले तीन सांसद औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियां इसके अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान बाहर से NDA को समर्थन देंगे। बसुनिया ने कहा, ''वे राजग का समर्थन करेंगे और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां या विभाग दिए जा सकते हैं।''

बसुनिया के घर और दफ्तर में आगजनी

बसुनिया का यह बयान उनके और उनकी पत्नी एवं तृणमूल विधायक संगीता रॉय के कूचबिहार के सिताई स्थित पैतृक घर लौटने पर विरोध प्रदर्शन का सामना किये जाने के कुछ दिन बाद आया है। बसुनिया के राजनीतिक रुख में बदलाव की आलोचना के बीच स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने दंपति के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान उनके आवास के पास स्थित तृणमूल के एक कार्यालय में भी कथित तौर पर आग लगा दी गई थी। बसुनिया लगातार यह कहते रहे हैं कि अब उनका तृणमूल से कोई संबंध नहीं है और वह NDA के साथ हैं।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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