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S-400 से कितना बेहतर है S-500, रूस का नया 'कवच' कितना भारी? जानें सबकुछ

S-400 से कितना बेहतर है S-500, रूस का नया 'कवच' कितना भारी? जानें सबकुछ

संक्षेप:

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रस्तावित भारत दौरे में मुख्य चर्चा का केंद्र बिंदु S-400 का उत्तराधिकारी S-500 प्रोमिथियस होगा, जिसे रूस भारत को को-प्रोडक्शन मॉडल के तहत ऑफर कर रहा है। आइये जानते हैं कि दोनों में अंतर क्या है।

Tue, 2 Dec 2025 10:52 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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मई 2025 में जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के हवाई हमलों को महज 7-8 मिनटों में पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था, तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई थी। उस ऐतिहासिक रात में सबसे चमकदार सितारा बना रूस निर्मित S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली, जिसने दुश्मन के दर्जनों फाइटर जेट्स, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स को आसमान में ही भाप बना दिया। S-400 की इस करिश्माई सफलता के बाद भारत ने तुरंत रूस से 5 और अतिरिक्त S-400 रेजिमेंट्स खरीदने का फैसला लिया, जिनकी डिलीवरी प्रक्रिया अब तेजी से चल रही है।

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लेकिन अब कहानी S-400 से आगे बढ़ चुकी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रस्तावित भारत दौरे में मुख्य चर्चा का केंद्र बिंदु S-400 का उत्तराधिकारी S-500 प्रोमिथियस होगा, जिसे रूस भारत को को-प्रोडक्शन (संयुक्त उत्पादन) मॉडल के तहत ऑफर कर रहा है। यह महज एक अपग्रेड नहीं, बल्कि पूरी तरह नया और क्रांतिकारी सिस्टम है। इसके तहत भारत की डीआरडीओ व निजी कंपनियां (जैसे भारत डायनेमिक्स, एलएंडटी, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स) रूस की अल्माज-एंटे कंपनी के साथ मिलकर S-500 की कई महत्वपूर्ण मिसाइलों व सब-सिस्टम्स का भारत में ही निर्माण करेंगी। यह अब तक का सबसे बड़ा भारत-रूस रक्षा सह-उत्पादन प्रोजेक्ट हो सकता है।

S-400 और S-500 में अंतर

  • मारक दूरी

S-400: 400 किमी

S-500: 500-600 किमी

  • अधिकतम ऊंचाई

S-400: 30 किमी

S-500: 180-200 किमी (निकट-अंतरिक्ष तक)

  • लक्ष्य प्रकार

S-400: लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइलें

S-500: उपरोक्त सभी + अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) और हाइपरसोनिक ग्लाइड हथियार (रूस के दावे अनुसार)

  • रक्षा की भूमिका

S-400: थिएटर स्तर की वायु रक्षा

S-500: राष्ट्रीय स्तर की बैलिस्टिक व हाइपरसोनिक रक्षा

  • इंटरसेप्टर मिसाइलें

S-400: 48N6, 40N6 परिवार

S-500: 77N6-N और 77N6-N1 (हिट-टू-किल तकनीक)

  • खतरे का स्तर

S-400: सामरिक व परिचालन स्तर के खतरे

S-500: सामरिक + रणनीतिक खतरे (भविष्य के हाइपरसोनिक युद्ध सहित)

  • सुरक्षा कवरेज

S-400: विशिष्ट क्षेत्र/थिएटर की रक्षा

S-500: पूरे देश के बड़े शहर, रणनीतिक बुनियादी ढांचा और कमांड सेंटर की छतरी

  • निवारक प्रभाव

S-400: क्षेत्रीय हवाई वर्चस्व

S-500: महाद्वीपीय स्तर का मिसाइल व हाइपरसोनिक वर्चस्व

बता दें कS-400 ने भारत के मौजूदा बहु-स्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क (स्वदेशी आकाश, इजरायली MRSAM, स्पाइडर आदि) के साथ बेहतरीन तालमेल दिखाया है। वहीं S-500 भारत-रूस के बीच अब तक का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत रक्षा सौदा बनने की राह पर है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें
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