ब्रिक्स बैठक में पुतिन ने पश्चिम देशों पर कसा तंज, बोले- पता नहीं क्यों G-7 बोलते हैं
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने संबोधन दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज ब्रिक्स, जी-7 देशों से कहीं आगे निकल गया है। पश्चिमी देश उस दबदबे को दोबारा हासिल करने के लिए बुरे तरीकों का प्रयोग कर रहे हैं।

ब्रिक्स के 18वें समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को बिजनेस फोरम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स के जरिए मुश्किलों का सामना किया जा सकता है। हमारा लक्ष्य ब्रिक्स देशों के बीच में व्यापार को बढ़ावा देना है। आज पश्चिमी देश कमजोर हो रहे हैं। ब्रिक्स ने जी-7 देशों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने पश्चिमी देशों के समूह जी-7 की अहमियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी में 40 फीसदी का योगदान देते हैं, जबकि जी-7 देश केवल 28 से 29 फीसदी ऐसे में पता नहीं वह अपने आप को जी-7 क्यों बोलते हैं।
पश्चिमी देश बुरे तरीकों से अपना दबदबा हासिल करने का प्रयास कर रहा है: पुतिन
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत मंडपम से पश्चिमी देशों के ऊपर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स आज जी-7 देशों से आगे निकल चुका है। ऐसे में अब वह अपना दबदबा फिर से हासिल करने के लिए बुरे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें जलमार्गों को रोकना और समुद्री जहाजों को जब्त करने शामिल है।
रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों की तरफ से उठाए जा रहे ऐसे कदमों की आलोचना करते हुए ईरान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि लगातार प्रतिबंधों की वजह से ईरान के व्यापार, शिपिंग और ग्लोबल फाइनेंशियल नेटवर्क तक उसकी पहुंच पर बुरा असर पड़ा है।
पुतिन का जी-7 देशों पर तीखा तंज, बोले- पता नहीं वह अपने आप को यह क्यों कहते हैं
ब्रिक्स समिट से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के संगठन जी-7 पर भी निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ब्रिक्स देश आज कुल मिलाकर वैश्विक जीडीपी का 40 फीसदी हिस्सा बनाते हैं, जबकि ग्लोबल इकोनॉमिक आउटपुट में जी7 देशों की हिस्सेदारी केवल 28 फीसदी है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "मुझे नहीं पता वह अपने आप को जी-7 क्यों कहते हैं।" पुतिन की इस बात को सुनकर वहां मौजूद लोगों ने जमकर तालियां भी बजाईं। बता दें, जी-7 समूह अपने आप को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह कहता है। एक समय तक इस समूह को जी-8 के नाम से जाना जाता था। उस वक्त तक रूस भी इसका सदस्य था। लेकिन 2014 में क्रीमिया पर हमला करने के बाद रूस को इस ग्रुप से बाहर निकाल दिया गया था।
व्यापारिक संबंधों को और ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत-पुतिन
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि देशों के बीच में भरोसेमंद बिजनेस-टू-बिजनेस संबंध और आर्थिक साझेदारियां अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संबंध अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों को ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाने में मदद करते हैं और देशों को दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं से निपटने में सहायता करते हैं।
अपडेट की जा रही है।


