छोटे समूहों में बैठकें और आलाकमान तक इनपुट, बंगाल चुनाव में RSS ने कैसे तैयार की जीत की नींव
सूत्रों के अनुसार, चुनावों के दौरान आरएसएस स्वयंसेवकों ने बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाए। राज्य भर में लोगों के साथ लगभग दो लाख बैठकें कीं। इस दौरान लोगों को चुनाव से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाया। इसके स्वयंसेवकों ने लोगों के छोटे-छोटे समूहों के साथ राज्य के हर कोने में बैठकें कीं और उनसे इस बार निर्भीक होकर अपना वोट डालने का आग्रह किया था। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस के स्वयंसेवकों ने जमीनी स्तर पर लोगों की नब्ज़ पर भी नजर रखी और भाजपा को जनता के मिजाज और प्रतिद्वंद्वियों की चाल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिससे पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति को बेहतर बनाने में मदद मिली। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का किला ढहाने में RSS स्वयंसेवकों का अहम योगदान है। इसे स्वीकार करते हुए एक सीनियर बीजेपी नेता ने बताया, 'उन्होंने वास्तव में बहुत मेहनत की।'
मतगणना अभी भी जारी है, लेकिन ताजा रुझानों से संकेत मिल रहा है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल को काफी पीछे छोड़ दिया है। बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 107 सीटों पर जीत हासिल कर ली है और 99 पर बढ़त बनाए हुए है। सूत्रों ने कहा, 'हमने जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया और लोगों तक अपना संदेश पहुंचाया। भाजपा ने भी इस सफलता को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की।' उन्होंने बताया कि पार्टी और संघ के स्वयंसेवकों ने हर स्तर पर उपयुक्त समन्वय के साथ काम किया।
RSS ने किस तरह से दिया योगदान
सूत्रों के अनुसार, चुनावों के दौरान आरएसएस स्वयंसेवकों ने बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाए। राज्य भर में लोगों के छोटे समूहों के साथ लगभग दो लाख बैठकें कीं। एक सूत्र ने बताया, 'इन बैठकों के दौरान लोगों को चुनाव से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया और निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया गया।' भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद अपना जनाधार मजबूत करते हुए उसका विस्तार करना शुरू कर दिया, जिसमें पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और 2016 की तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीत लीं।
आरएसएस ने भी राज्य में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद भाजपा के अगले चुनावी अभियान के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी। संघ के एक अन्य सूत्र ने कहा, '2021 में तृणमूल की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा में कई कार्यकर्ता मारे गए। लेकिन हम रुके नहीं। हमने अपना काम जारी रखा। हम चुनाव बाद की हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे और उन्हें राहत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया। हमने उन्हें कानूनी सलाह, मुआवजा और उनके घरों के पुनर्निर्माण में मदद की, जिन्हें चुनाव बाद हुई हिंसा में आग के हवाले कर दिया गया था या क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। हमने उनकी आजीविका का भी ध्यान रखा।'
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लेखक के बारे में
Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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