10000 करोड़ की चोरी के पीछे का ‘चाणक्य’ कौन? कांग्रेस ने मोदी सरकार पर लगा दिया बड़ा आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपने 'अपने लोगों' को कार्रवाई से बचा रही है। कांग्रेस ने यह सवाल भी उठाया कि निर्वाचन आयोग की भाजपा के साथ मिलीभगत है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने अब JPC से जांच की मांग की है।

कांग्रेस ने बुधवार को मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि देश में गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये की आयकर चोरी का घोटाला हुआ है। पार्टी ने सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग पर इसमें मिलीभगत के इल्जाम लगाए। अब कांग्रेस ने इस मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से कराने की मांग की है। फिलहाल आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इससे पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में भाजपा को घेरा। जयराम रमेश ने सवाल उठाए है कि 3260 'फर्जी राजनीतिक दलों' के पीछे का 'चाणक्य' कौन है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री आप विदेश से काला धन वापस लाने में नाकाम रहे और नागरिकों को अभी तक वादे के अनुसार 15-15 लाख रुपये नहीं मिले हैं। अब ऐसा लगता है कि भाजपा के संरक्षण में देश के भीतर ही काले धन को 'सफेद' करने की एक योजना चल रही है।''
सरकार क्यों चुप?- रमेश
रमेश ने आगे कहा, ''हमें याद है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे और उसे भारी-भरकम कर नोटिस भेजे गए थे। यह पार्टी को आर्थिक रूप से कमजोर करने के मकसद से उठाया गया एक बेहद अलोकतांत्रिक कदम था।'' उन्होंने पूछा, ''तो इन 3,260 फर्जी राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े कर चोरी के मामलों की जांच क्यों नहीं हो रही है?'' रमेश ने आरोप लगाया, ''क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि इन धोखाधड़ी करने वाले दलों को भाजपा नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त था और वे सरकार की मौन सहमति से ही इस पूरे घोटाले को अंजाम दे रही थे?''
'भाजपा की C टीम'
इससे पहले शक्तिसिंह गोहिल ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि देश में 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं जिनका इस्तेमाल टैक्स से बचने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘’घोटाला यह है कि इन 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये का चंदा इकट्ठा किया है।'' गोहिल ने कहा कि जब 2025 में एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट आई, तो कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा था कि दोषी पाए गए लोगों को दिए जाने वाले चंदे को अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए और उन्हें उनसे कोई लाभ नहीं मिलना चाहिए। लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि कर चोरी के घोटालों में चार्टर्ड अकाउंटेंट की भी बड़ी भूमिका थी और आयकर अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा था कि ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट के खुलकर कार्रवाई की जानी चाहिए। गोहिल ने कहा, ''लेकिन 'ऊपर' से ऐसी किसी कार्रवाई का कोई आदेश नहीं आया है, क्योंकि ये उनकी अपनी 'सी टीम' है। आयकर अपील न्यायाधिकरण ने कहा है कि इस तरह की कर चोरी देश के लिए घातक है। यह काला धन देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को कमजोर करेगा।'' उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार कार्रवाई से अपने ''अपने लोगों'' को बचा रही है।
क्या है कांग्रेस की मांग?
कांग्रेस ने कहा कि मामले की जांच जेपीसी से कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आयकर अधिनियम की धारा 270ए(9) और धारा 2ए के तहत 200 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाए। गोहिल ने यह भी मांग की कि कथित घोटाले में शामिल लेखाकारों के खिलाफ धारा 276सी (1) और 277 के तहतजी आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और दोषी पाए जाने पर उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएं। उन्होंने कथित फर्जी राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की भी मांग की। गोहिल ने कहा, ''सरकार को चुनावों में दिए गए चंदे से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि आम लोग इसके बारे में जान सकें।' उन्होंने यह भी मांग की कि इस बात की जानकारी सार्वजनिक की जाए कि कथित फर्जी राजनीतिक दलों से जुड़े कितने लोग बाद में भाजपा में शामिल हुए।


