आपकी बेटी को किसी के साथ छोड़ूं, कहने वालीं हरियाणा महिला आयोग प्रमुख का इस्तीफा

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पिता के दाखिले के बाद लड़की के पेट में भी अचानक दर्द हुआ, तो उसे वहां तैनात डॉक्टर शैली ने जांच के बाद महिला वार्ड में भर्ती कर लिया। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी डॉक्टर शैली ने लड़की को ओपीडी के एक सुनसान कमरे में ले जाकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।

आपकी बेटी को किसी के साथ छोड़ूं, कहने वालीं हरियाणा महिला आयोग प्रमुख का इस्तीफा

कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल में भर्ती 15 साल की लड़की से वहां तैनात डॉक्टर के रेप करने के बाद वहां दौरे के समय राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ सारा अग्रवाल समेत ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ को फटकार लगाने और उनकी बेटी को 15 मिनट के लिए भी किसी कमरे में अकेला छोड़ने के बयान से मचे बवाल के बाद मंगलवार देर रात चेयरपर्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर आज नर्सिंग एसोसिएशन ने पूरे हरियाणा में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक डॉक्टरों और नर्सों ने कामकाज ठप रखा।

ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्स फेडरेशन इस मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री नायब सैनी के दरबार में पहुंच गई। फेडरेशन ने सीएम को बकायदा एक लिखित शिकायत भेजकर महिला आयोग की अध्यक्ष भाटिया को तत्काल प्रभाव से उनके पद से बर्खास्त करने की मांग उठाई। साथ ही कल बुधवार को भी दो दिन और वीरवार को पूरे दिन हड़ताल की चेतावनी दी थी। इसके बाद भाटिया विवाद बढ़ते देख देर रात दस बजे अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

महिलाओं के अधिकारों, सम्मान की लड़ाई लड़ती रहूंगी: रेणु

भाटिया ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नायब सैनी को भेज दिया। इसमें उन्होंने लिखा कि मैंने अपने पिछले लगभग साढ़ चार साल के कार्यकाल में अपनी निष्ठा और ईमानदारी से अध्यक्ष, हरियाणा राज्य महिला आयोग के पद पर कार्य किया है। इसके लिए मैं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और वर्तमान माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार प्रकट करती हूं। आश्वस्त करती हूं कि महिलाओं के अधिकारों एवं सम्मान की लड़ाई सदैव लड़ती रहूंगी। भविष्य में भी मुझे किसी पद पर नियुक्त किया जाएगा तो उसका निर्वाह पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करूंगी। इस पद से त्याग पत्र दे रही हूं।

पहले इस्तीफा न देने पर अड़ी थीं

विवाद के बीच भाटिया ने पहले कहा ​था कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और अपने बयान पर अडिग हैं। उनका कहना था कि मामले की जांच के दौरान जो सवाल उठाए गए, वे पीड़िता की सुरक्षा और अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन तीन नर्सों की ड्यूटी संबंधित समय पर लगी हुई थी, वे मौके पर मौजूद क्यों नहीं थीं? उन्होंने कहा कि इस पहलू की जांच जरूरी है और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

हॉस्पिटल के डॉक्टर ने ओपीडी में की दरिंदगी

29 मई को कुरुक्षेत्र के एक गांव की 15 वर्षीय लड़की अपने बीमार पिता को अस्पताल में भर्ती कराने आई थी। पिता के दाखिले के बाद लड़की के पेट में भी अचानक दर्द हुआ, तो उसे वहां तैनात डॉक्टर शैली ने जांच के बाद महिला वार्ड में भर्ती कर लिया। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी डॉक्टर शैली ने लड़की को ओपीडी के एक सुनसान कमरे में ले जाकर उसके साथ कई बार दरिंदगी की।

जब पीड़िता को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा तो उसे आनन-फानन में इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया, जहां उसने सीनियर डॉक्टरों को अपने साथ हुई इस दरिंदगी के बारे में बताया। भेद खुलते ही आरोपी डॉक्टर शैली अस्पताल छोड़कर भाग निकला। 31 मई को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी थाने में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसकी सेवाएं तुरंत समाप्त कर दीं। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

रिपोर्ट: मोनी देवी

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Nisarg Dixit

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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