OP Sindoor: छिपाए गए शहीदों के नाम? अब सरकार का भी आ गया बयान, बताया पूरा सच
Operation Sindoor: के दौरान शहीद हुए सैनिकों को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाये जा रहे विवाद पर रक्षा मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद अब सेना ने भी सफाई दी है। सेना ने कहा है कि यह पहला मौका नहीं है जब इन सैनिकों की शहादत को मान्यता दी गई है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सैनिकों को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाये जा रहे विवाद पर रक्षा मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद अब सेना ने भी सफाई दी है। सेना ने कहा है कि यह पहला मौका नहीं है जब इन सैनिकों की शहादत को मान्यता दी गई है। इससे पहले भी इनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया है। इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पिछले वर्ष संसद में दिए गए बयान को लेकर उठाये जा रहे सवालों पर कहा कि इस बारे में कही जा रही बातें जानबूझकर गुमराह करने वाली और तथ्यों के हिसाब से गलत हैं।
सोशल मीडिया पर फै रहे दावों की सच्चाई क्या है‘
सेना ने शनिवार को सोशल मीडिया एक पोस्ट में कहाकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ खबरें चल रही हैं। इन खबरों में गलत तरीके से यह कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान छह बहादुर सैनिकों की सर्वोच्च शहादत को हाल ही में पहली बार मान्यता दी गयी या लोगों के सामने लाया गया। सेना ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि देश ने इन शहीद नायकों को बहुत पहले ही, यानी उन खबरों के आने से काफी समय पहले ही श्रद्धांजलि दे दी थी। तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक ने पिछले साल 11 मई को आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्हें विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ड्यूटी पर उनकी शहादत को मान्यता दी।
ऑपरेशन सिंदूर के बलिदानी को दिए गए थे वीरता पुरस्कार
इन बहादुर सैनिकों को वीरता पुरस्कार दिए गए और इसकी जानकारी 14 अगस्त की प्रेस विज्ञप्ति में प्रकाशित की गई। यह भारतीय रक्षा बलों की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप उनकी वीरता और सर्वोच्च शहादत को औपचारिक और राष्ट्रीय मान्यता देने जैसा था। साथ ही, भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बिना किसी देरी के इन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद भी देश इन नायकों को सम्मान देता रहा है।
इस साल जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड के दौरान सेना प्रमुख ने इनमें से तीन बहादुर सैनिकों के परिवारों को सेना पदक (वीरता) प्रदान किया, जबकि वायु सेना प्रमुख ने पिछले वर्ष अक्टूबर में गरिमापूर्ण समारोह में ऐसा ही किया। इससे देश की सेवा में अपनी जान गंवाने वालों का सम्मान करने के प्रति रक्षा बलों की अटूट प्रतिबद्धता फिर से जाहिर हुई।
बेबुनियाद विवाद
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित किए जाने के संबंध में कहा गया कि इस बात पर जोर दिया जाता है कि यह पवित्र प्रक्रिया एक स्थापित और स्पष्ट प्रोटोकॉल के तहत होती है। रक्षा बल इन तय प्रक्रियाओं का पूरी सावधानी, ध्यान और सम्मान के साथ पालन करते हैं, जो दिए जा रहे सम्मान की गरिमा के अनुरूप होता है। यह कहना कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है। सेना ने कहा है कि यह अफसोस की बात है कि इस मुद्दे को लेकर एक अनावश्यक और बेबुनियाद विवाद खड़ा हो गया है। ऐसी बातें न केवल तथ्यों को गलत तरीके से पेश करती हैं, बल्कि शोक संतप्त परिवारों को अनावश्यक दुख पहुंचाने और देश की सेवा में सर्वोच्च शहादत देने वालों के सम्मान को कम करने का जोखिम भी पैदा करती हैं।
सेना ने सभी संबंधित लोगों से आग्रह किया है कि वे शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करते समय जिम्मेदारी और संयम बरतें और बिना पुष्टि की गई जानकारी न फैलाएं। भारतीय रक्षा बल देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले हर सैनिक का सम्मान करने के अपने संकल्प पर अडिग हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के छह बहादुर सैनिक राष्ट्रीय नायक हैं, जिनका साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और बलिदान भारतीयों की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी याद का सम्मान हमेशा उस गरिमा, कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ किया जाएगा जिसके वे हकदार हैं।
लेखक के बारे में
Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।


