Hindi NewsIndia NewsRemove yourselves from India in 24 hours Assam government ultimatum to 15 people, relying on dormant Act 1950
24 घंटे के अंदर छोड़ो हमारा देश, असम ने 15 को क्यों थमाया अल्टीमेटम; कौन हैं ये लोग?

24 घंटे के अंदर छोड़ो हमारा देश, असम ने 15 को क्यों थमाया अल्टीमेटम; कौन हैं ये लोग?

संक्षेप:

1950 के एक्ट का हवाला देते हुए इन आदेशों में इन 15 लोगों को 24 घंटे के अंदर असम धुबरी/श्रीभूमि/साउथ सालमारा-मानकाचर रास्ते से भारत के इलाके से खुद को हटाने का निर्देश दिया गया है, जिसका मतलब है कि उन्हें बांग्लादेश भेजा जाएगा।

Dec 18, 2025 10:59 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, गुवाहाटी
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असम के नगांव जिले में 15 लोगों को 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया गया है। ये ऐसे लोग हैं, जिन्हें अलग-अलग सालों में 1990 से लेकर 2021 तक फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था। अब राज्य सरकार ने 1950 के इमिग्रेंट्स (असम से निष्कासन) (IEAA) एक्ट के तहत 24 घंटे के अंदर इन लोगों को भारत से जाने का निर्देश दिया है। नगांव के पुलिस अधीक्षक स्वप्ननील डेका ने बताया कि ये लोग अभी गोलपारा के मटिया में डिटेंशन सेंटर में हैं और उन्हें देश से निकालने की प्रक्रिया शुक्रवार को शुरू कर दी जाएगी।

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बुधवार यानी 17 दिसंबर को नगांव के डीसी देवाशीष शर्मा ने इन 15 लोगों के खिलाफ देश छोड़ने के आदेश जारी किया है। हर आदेश में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले का ज़िक्र है, जिसमें उन्हें विदेशी घोषित किया गया था और कहा गया है कि अथॉरिटी का मानना ​​है कि “विदेशी नागरिक घोषित होने के नाते, भारत/असम राज्य में आपकी मौजूदगी आम जनता के हित और राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए हानिकारक है।”

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ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया

1950 के एक्ट का हवाला देते हुए इन आदेशों में इन 15 लोगों को 24 घंटे के अंदर असम धुबरी/श्रीभूमि/साउथ सालमारा-मानकाचर रास्ते से भारत के इलाके से खुद को हटाने का निर्देश दिया गया है, जिसका मतलब है कि उन्हें बांग्लादेश भेजा जाएगा। ये 15 लोग नगांव ज़िले के अलग-अलग गांवों और कस्बों के रहने वाले हैं और उन्हें पिछले कुछ सालों में अलग-अलग मामलों में ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था।

सितंबर में असम कैबिनेट ने एक्ट के लिए SOP को मंज़ूरी दी थी

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में डीसी देवाशीष शर्मा ने कहा, "इन लोगों ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में केस दायर किए थे, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को मंज़ूरी नहीं दी। अब उन्हें एसपी की देखरेख में सही समय पर हटा दिया जाएगा।" बता दें कि इस साल सितंबर में, असम कैबिनेट ने 1950 के एक्ट के लिए एक SOP को मंज़ूरी दी थी, जो उसी साल से निष्क्रिय पड़ा था।

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देश विभाजन के बाद बनाया गया था कानून

IEAA 1950 एक ऐसा कानून है जिसे उस समय की केंद्र सरकार ने बनाया था। देश विभाजन के बाद के सालों में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से होने वाले प्रवासन को रोकने के उपायों की ज़रूरत के हिसाब से तत्कालीन असम सरकार के दबाव के बाद यह कदम उठाया गया था। इस एक्ट में कहा गया था कि अगर केंद्र सरकार को लगता है कि किसी ऐसे व्यक्ति का रहना – जो आम तौर पर भारत के बाहर किसी जगह का रहने वाला है और एक्ट शुरू होने से पहले या बाद में असम आया है और वो भारत की आम जनता या उसके किसी हिस्से या असम की किसी भी अनुसूचित जनजाति के हितों के लिए नुकसानदायक है, तो ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को असम या भारत से हटाने का निर्देश दे सकती है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार यह शक्ति केंद्र सरकार या असम सरकार के किसी भी अधिकारी को सौंप सकती है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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