क्षेत्रीय दलों पर भी बरस रहा चंदा, एक साल में तीन गुना बढ़ा; इस पार्टी को मिला सबसे ज्यादा

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क्षेत्रीय दलों को भी मिलने वाला चंदा पिछले एक साल में तीन गुना बढ़ गया है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक  सबसे ज्यादा चंदा डीएमके को मिला है। वहीं दूसरे नंबर पर टीएमसी है।

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क्षेत्रीय दलों में डीएमके और टीएमसी को सबसे ज्यादा चंदा

देश में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाला घोषित चंदा एक साल में तीन गुना से अधिक बढ़ गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक चंदा पाने वाले शीर्ष तीन क्षेत्रीय दलों में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके), तृणमूल कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस रहे।

इन तीन दलों को सबसे ज्यादा चंदा

2024-25 में मिले 1050 करोड़ के कुल चंदे में इन तीनों दलों की ही लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 40 क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे के विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट गुरुवार को जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय दलों को 2024-25 में कुल 1,051.56 करोड़ रुपये चंदा मिला, जबकि 2023-24 में कुल 347.69 करोड़ चंदा मिला। इस तरह 2024-25 में तीन गुना अधिक चंदा मिला। वहीं, 2023-24 में चंदे की कुल संख्या 2861 थी, जो 2024-25 में 85 प्रतिशत बढ़कर 5297 हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, द्रमुक को 2024-25 में सर्वाधिक 365.78 करोड़ का घोषित दान मिला। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस को 184.96 करोड़ और वाईएसआर कांग्रेस को 140.04 करोड़ मिले। इन तीनों दलों को मिलाकर कुल चंदा 690.78 करोड़ रहा, जो सभी दलों को मिले कुल चंदे का लगभग 70% है। वहीं, 2023-24 में सर्वाधिक चंदा पाने वाला क्षेत्रीय दल तेलुगु देशम पार्टी रहा, जिसे 100.19 करोड़ का दान मिला था। द्रमुक को अघोषित दानदाताओं से सबसे अधिक 300.64 करोड़ रुपये मिले, जो उसे मिले कुल घोषित दान से 82% से अधिक रहा। वहीं, टीएमसी, वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी, अन्नाद्रमुक और बीजद लगभग पूरी तरह से कॉरपोरेट और बिजनेस घरानों से मिले दान पर निर्भर थे। अन्य दानदाताओं की श्रेणियों से उनका योगदान नगण्य या शून्य रहा।

दानदाता2023-242024-25
कॉरपोरेट227.61 करोड़644.93 करोड़
व्यक्तिगत दान102.42 करोड़51.91 करोड़
पार्टी/ संगठन11.03 करोड़12.44 करोड़

रिपोर्ट के अनुसार, बिना पैन जानकारी के दिया गया दान 2023-24 में 7.69 करोड़ रुपये था। यह 2024-25 में 329.58 करोड़ हो गया। वहीं, नगद चंदा 2023-24 के 6.54 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 301.44 करोड़ हो गया। राजनीतिक फंडिंग में कॉर्पोरेट व बिजनेस घरानों का दबदबा बना रहा। उन्होंने 2024-25 में 644.93 करोड़ का योगदान दिया, जो 2023-24 के 227.61 करोड़ से तीन गुना है।

ये रहे शीर्ष दानदाता

प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट 434 करोड़ (2023-24, 2024-25)

टाइगर एसोसिएट्स - 160 करोड़ (2023-24, 2024-25)

प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट 70 करोड़ 2024-25

वेदांता लिमिटेड 45र करोड़- 2024-25

एबी जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट 32 करोड़- 2024-25

चंद्रशेखर पेम्मसानी 30.5 करोड़- 2023-24

रविशंकर पेम्मसानी 17.5 करोड़- 2023-24

बाश्याम कंस्ट्रक्शन्स 10 करोड़- 2023-24

इन दलों को मिला सबसे ज्यादा चंदा (2024-25)

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK)- 365.78

तृणमल कांग्रेस -184.96

वाईएसआर कांग्रेस- 140.04

तेलुगुदेशम पार्टी 83.03

अन्नाद्रमुक 66.30

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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