रेड टेप वालों ने कैरी बैग के 10 रुपये ले लिए, अब 8000 वापस देने पड़ गए; ग्राहक की जीत

लाइव हिन्दुस्तान, चंडीगढ़
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हरियाणा के रोहतक में मशहूर फुटवियर ब्रांड Red Tape को ग्राहक से कैरी बैग के 10 रुपये वसूलना भारी पड़ गया। उपभोक्ता अदालत ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कंपनी पर 8,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जानिए क्या है पूरा मामला।

Red Tape fined, consumer court carry bag charges case

हरियाणा के रोहतक में एक ग्राहक को जूतों के साथ 10 रुपये का कैरी बैग थमाना मशहूर फुटवियर ब्रांड 'रेड टेप' (Red Tape) को काफी भारी पड़ गया। तीन साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद हरियाणा उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने इस अतिरिक्त शुल्क को अनुचित ठहराते हुए रेड टेप को बैग के 10 रुपये वापस करने के साथ-साथ ग्राहक को 8,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च चुकाने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2023 को रोहतक के एक 27 वर्षीय युवक ने रेड टेप लिमिटेड के आउटलेट से 2,069.70 रुपये के काले रंग के जूते खरीदे थे। बिलिंग के दौरान आउटलेट ने कैरी बैग के लिए अलग से 10 रुपये चार्ज किए। ग्राहक ने जब मुफ्त में बैग देने की मांग की, तो कर्मचारियों ने कंपनी की पॉलिसी का हवाला देते हुए साफ इनकार कर दिया।

इस बात से नाराज होकर ग्राहक ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैग के लिए पैसे वसूलना गैरकानूनी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। ग्राहक ने फोरम से गुहार लगाई थी कि उन्हें मानसिक प्रताड़ना के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा और 22,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में दिलाए जाएं।

कंपनी ने दी 'पर्यावरण बचाने' की दलील

इस मामले में रेड टेप का पक्ष रख रहे वकील मुकेश सिंह ने शिकायत को खारिज करने की अपील की। कंपनी का तर्क था कि कैरी बैग का शुल्क लेने का मकसद ग्राहकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना, पेड़ बचाना और कैरी बैग के इस्तेमाल को कम करना था।

कंपनी ने कहा कि जब बैग मुफ्त दिए जाते हैं तो ग्राहक उसका दुरुपयोग करते हैं। शोरूम के बाहर पहले ही इसकी सूचना दी गई थी कि ग्राहक पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए अपने बैग खुद ला सकते हैं।

कंपनी की दलील थी कि बैग खरीदना किसी भी ग्राहक के लिए अनिवार्य नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से ग्राहकों की सहमति पर निर्भर था। इसके अलावा बैग पर कोई ब्रांडिंग नहीं थी, जिससे कंपनी का प्रचार हो रहा हो।

ग्राहक के वकील का तर्क- 'सामान देना कंपनी की जिम्मेदारी'

वहीं, ग्राहक की ओर से पेश हुए वकील संदीप कुमार ने अपनी जोरदार दलील में कहा कि कोई भी कंपनी बैग की कीमत नहीं वसूल सकती। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को 'डिलीवरी योग्य स्थिति' में सामान सौंपना दुकानदारों और कंपनियों का बुनियादी फर्ज है। व्यापार के संचालन के तहत दुकानदारों को ऐसे बैग की कीमत खुद उठानी चाहिए, क्योंकि यह बेसिक कस्टमर सर्विस का हिस्सा है।

उपभोक्ता आयोग ने क्या फैसला सुनाया?

हरियाणा उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादियान और सदस्य तृप्ति पन्नू व डॉ. विजेंद्र सिंह की बेंच ने 12 जून को इस मामले पर अपना फैसला सुनाया। आयोग ने पाया कि रेड टेप के खुद के हलफनामे में ऐसी बातें शामिल थीं, जो इस बात को स्वीकार करती हैं कि कैरी बैग के लिए बेवजह पैसे लिए गए थे।

अदालत ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया। आयोग ने रेड टेप को आदेश दिया कि वह कैरी बैग के 10 रुपये रिफंड करे। इसके अलावा 30 दिन के भीतर 4,000 रुपये सेवा में कमी के मुआवजे के तौर पर और 4,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में (कुल 8000 रुपये) ग्राहक को चुकाए जाएं।

क्या हैं इस फैसले के मायने?

यह फैसला ग्राहकों की जागरूकता और उनके अधिकारों की ताकत को दर्शाता है। 10 रुपये के एक मामूली से कैरी बैग से शुरू हुआ यह विवाद अनुचित व्यापार के खिलाफ एक बड़ी नजीर बन गया है। यह साफ दिखाता है कि उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई में विवादित रकम कितनी छोटी है, यह मायने नहीं रखता, बल्कि मामले से जुड़े सिद्धांत ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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